जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, वैष्णव तिलक से दमका ज्योतिर्लिंग

 


- भस्म आरती में पंचामृत अभिषेक के बाद भांग-चंदन और भस्म से शृंगार, शेषनाग के रजत मुकुट से सजे महाकाल

उज्जैन, 04 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के जन्माष्टमी पर्व पर बाबा महाकाल की भस्म आरती विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और दिव्य श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। भगवान महाकाल को श्रीकृष्ण स्वरूप में सजाया गया और वैष्णव तिलक अर्पित किया गया। पंचामृत अभिषेक के बाद भांग, चंदन, भस्म, ड्रायफ्रूट और सुगंधित पुष्पों से बाबा का अलौकिक शृंगार किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा।

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर तड़के मंदिर के कपाट खोले गए। कपाट खुलने से पहले सभा मंडप में वीरभद्रजी के कान में स्वस्ति वाचन किया गया। इसके बाद घंटी बजाकर भगवान महाकाल से आज्ञा ली गई और सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए। गर्भगृह के पट खुलने के बाद पुजारियों ने भगवान का पूर्व श्रृंगार उतारकर विधिवत पूजन-अर्चन शुरू किया।

जलाभिषेक के बाद पंचामृत से पूजन

सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का जल से अभिषेक हुआ। दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक और पूजन किया गया। कर्पूर आरती के बाद विभिन्न धार्मिक विधियां संपन्न कराई गईं।

इधर नंदी हॉल में नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। भस्म आरती की प्रक्रिया के दौरान श्रद्धालु धार्मिक मंत्रोच्चार और बाबा महाकाल के जयकारों में लीन रहे।

वैष्णव तिलक, रजत आभूषण और शेषनाग मुकुट से श्रृंगार

जन्माष्टमी के अवसर पर बाबा महाकाल के शृंगार में वैष्णव परंपरा की झलक भी दिखाई दी। भगवान को वैष्णव तिलक अर्पित किया गया। इसके साथ भांग, चंदन, ड्रायफ्रूट और भस्म चढ़ाई गई। बाबा महाकाल को रजत चंद्र, त्रिशूल और विभिन्न रजत आभूषण धारण कराए गए। श्रृंगार में शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। इसके बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया।

भस्म अर्पण की विशेष परंपरा

भस्म आरती से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कर्पूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर विधि-विधान से भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। महाकाल मंदिर की परंपरा के अनुसार भस्म आरती के बाद भगवान के साकार स्वरूप के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं के लिए यह आरती बाबा महाकाल के दर्शन और आराधना का सबसे महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है।

नंदी के कान में मनोकामना लेकर पहुंचे श्रद्धालु

जन्माष्टमी के अवसर पर भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद श्रद्धालु नंदी महाराज के दर्शन के लिए पहुंचे और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहीं। मान्यता के अनुसार नंदी महाराज के माध्यम से भगवान शिव तक अपनी प्रार्थना पहुंचाने की परंपरा है। भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में लगातार हर-हर महादेव और बाबा महाकाल के जयकारे गूंजते रहे। धार्मिक वातावरण और विशेष श्रृंगार ने जन्माष्टमी पर्व पर महाकाल की नगरी की आध्यात्मिक आभा को और बढ़ा दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे