जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री की बातचीत, क्षेत्रीय तनाव और शांति पर जोर
नई दिल्ली/तेहरान, 21 मार्च (हि.स.)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत और ईरान के मध्य कूटनीतिक बातचीत तेज हो गई है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय हालात और युद्ध के प्रभावों पर चर्चा की।
दोनों नेताओं के बीच बातचीत में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, उसके क्षेत्रीय प्रभाव और वैश्विक असर पर विचार-विमर्श हुआ। साथ ही भारत-ईरान के द्विपक्षीय संबंधों और भविष्य में सहयोग को मजबूत करने पर भी सहमति जताई गई।
ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका और इजराइल के हमलों को गलत बताते हुए कहा कि इन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया के स्वतंत्र देशों को एकजुट होकर उन देशों पर दबाव बनाना चाहिए, जो इस युद्ध के लिए जिम्मेदार हैं, ताकि हमले बंद हो सकें और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
अराघची ने फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के हालात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ता तनाव मौजूदा हमलों का परिणाम है और स्थिति तभी सामान्य हो सकती है, जब हमले पूरी तरह बंद हों और भविष्य में उनकी पुनरावृत्ति न हो।
वहीं, जयशंकर ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थक है।
दोनों नेताओं ने भारत और ईरान के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने पर भी सहमति जताई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं, और भारत संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाते हुए क्षेत्रीय शांति में योगदान देना चाहता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय