नारी चेतना ही समाज की प्रगति का मूल आधार: राष्ट्रपति
नई दिल्ली, 08 मार्च हि.स.)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को कहा कि नारी चेतना ही समाज की प्रगति का मूल आधार है।उन्होंने कहा कि साल 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य केवल तकनीकी प्रगति से नहीं बल्कि सांस्कृतिक जड़ों और नारी के पूर्ण सशक्तिकरण से प्राप्त होगा।
द्रौपदी मुर्मु आज यहां विज्ञान भवन में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला विचारक सम्मेलन 'भारती' के समापन समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने 'पद्म भारती' काफी टेबल पुस्तक का लोकार्पण भी किया। इस कार्यक्रम का विषय भारती- नारी से नारायणी पर आधारित था।
राष्ट्र सेविका समिति, शरण्या और भारतीय विद्वत परिषद् द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस समारोह में राष्ट्रपति ने कहा, 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य केवल तकनीकी प्रगति से नहीं बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों और नारी शक्ति के पूर्ण सशक्तिकरण से प्राप्त होगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में दर्शन, चिकित्सा, खगोल विज्ञान, गणित, साहित्य तथा कला की महान विरासत को ज्ञान भारतम् मिशन जैसे प्रयासों से संरक्षित और प्रसारित किया जा रहा है। भारतीय भाषाओं तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को प्राथमिकता देकर आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण को सांस्कृतिक आधार प्रदान किया जा रहा है। ऐसे प्रयासों से जुड़े सभी संस्थानों को पारस्परिक समन्वय के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
मुर्मु ने राष्ट्र सेविका समिति और 'सरण्या' जैसे समूहों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ये वंचित वर्गों की महिलाओं को नेतृत्व क्षमता और कौशल प्रदान कर रहे हैं। समाज के रथ के दोनों पहिए (स्त्री और पुरुष) जब समान रूप से चलेंगे, तभी भारत एक तेजस्वी राष्ट्र बनेगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन और विज्ञान को सहेजने के लिए इस वर्ष बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन के पावन अवसर पर राष्ट्रपति भवन में ‘ग्रंथ कुटीर’ नामक विशेष पुस्तकालय का शुभारंभ किया गया है जहां प्राचीन पांडुलिपियों का संग्रह आम जनता के लिए उपलब्ध है।
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत को 'समर्थ' और 'समृद्ध' बनाने का मार्ग नारी शक्ति के सशक्तिकरण से होकर ही गुजरता है।
राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख कार्यवाहिका सीता गायत्री ने कहा कि नारी शक्ति के अंदर जो 'नारायणी' बसी है, उसे अब हमें उनके काम और उनकी उपलब्धियों के जरिए दुनिया को दिखाना है। इस आयोजन का असली मकसद यही है कि हम उनकी शक्ति को हकीकत में बदल सकें।
राष्ट्र सेविका समिति की अध्यक्ष वी. शांता कुमारी (शांतक्का) ने कहा कि केवल विचार सुनना काफी नहीं है बल्कि उसे आचरण में उतारना (कृति रूप) अनिवार्य है। इंदिरा नुई जैसे वैश्विक नेतृत्व का उदाहरण देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि हम अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग जरूर करें लेकिन अपनी भारतीय संस्कृति की जड़ों को कभी न छोड़ें। नारी से नारायणी बनने का अर्थ 'अपने ज्ञान से समाज में उजाला फैलाना' है।
केकेएसयू की मीडिया प्रमुख डॉ रेणुका बोकरे ने बताया कि यह सम्मेलन नारी की आंतरिक 'आत्मशक्ति' को जागृत करने का सामूहिक ध्यान था। इस यात्रा को आठ स्तंभों (अष्टांग) प्रकृति, चेतना, संस्कृति, विद्या, कृति, शक्ति, सिद्धि और मुक्ति में विभाजित किया गया। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के 26 राज्यों से लगभग 1500 प्रत्यक्ष प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि 15 हजार से अधिक लोग ऑनलाइन माध्यम से इस वैचारिक मंथन का हिस्सा बने। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों की 200 से अधिक विशेषज्ञ महिलाएं मुख्य वक्ता और 'चिंतक' के रूप में विशेष रूप से शामिल थी। इसके अलावा महिला सांसदों, विश्वविद्यालय की महिला कुलपतियों और आध्यात्मिक गुरुओं के लिए अलग-अलग खास सत्र आयोजित किये गए।
इससे पहले भारतीय विद्वत परिषद की सचिव प्रो. शिवानी वी ने कहा कि समारोह के लिए महिलाओं के विकास और शिक्षा से जुड़े 8 खास विषयों को चुना गया था। इस चर्चा में कानून, शिक्षा, पत्रकारिता और प्रशासन जैसे हर क्षेत्र की अग्रणी महिलाएं एकत्रित हुईं।
इस सम्मेलन का उद्घाटन 7 मार्च को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किया था। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों की प्रबुद्ध महिलाओं को एक मंच पर लाना और 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को साकार करने में उनके योगदान पर चर्चा करना है। इस मौके पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी हुईं और शिक्षा मंत्री ने 'स्वयंसिद्धा:महाराष्ट्रातांल कर्तत्ववान महिला' पुस्तक का लोकार्पण किया।
इस दौरान चार विशेष पैनलों के माध्यम से बहुआयामी विचार-मंथन हुआ। महिला सांसदों का राष्ट्रीय पैनल ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर चर्चा की गयी। महिला कुलपतियों का अलग पैनल तथा ‘साध्वी संगम’ पैनल योग, धर्म और अध्यात्म के संगम पर विचार आयोजित किया गया।
इस मौके पर साध्वी ऋतंबरा, शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, केंद्रीय परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह और रक्षा विज्ञान साहित्य न्यायपालिका जैसे विभिन्न क्षेत्रों से विशेषज्ञ सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।
सम्मेलन के अंत में केन्द्र सरकार को महत्वपूर्ण नीतिगत सुझाव सौंपे गए और महिला विचारकों का एक राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार किया गया ताकि महिला नेतृत्व की यह मुहिम हर वर्ष जारी रह सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी