मस्कट पहुंचा आईएनएसवी कौंडिन्य, सर्बानंद सोनोवाल ने किया स्वागत

 


नई दिल्ली, 14 जनवरी (हि.स.)। भारतीय नौसेना का पारंपरिक नौकायन पोत आईएनएसवी कौंडिन्य गुजरात के पोरबंदर से अपनी पहली समुद्री यात्रा पूरी कर ओमान की राजधानी मस्कट पहुंच गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर मस्कट स्थित पोर्ट सुल्तान काबूस में पोत और उसके चालक दल का स्वागत केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने किया।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार यह यात्रा भारत और ओमान के बीच लगभग 5,000 वर्ष पुराने समुद्री संबंधों को पुनर्जीवित करने का प्रतीक है। यह अभियान भारत और ओमान के बीच गहरे समुद्री, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को रेखांकित करता है, जो सहस्राब्दियों से व्यापार और समुद्री संपर्क के माध्यम से विकसित हुए हैं। इस यात्रा का विशेष महत्व इसलिए भी है, क्योंकि भारत और ओमान के इस सालकूटनीतिक संबंधों के 70 साल पूरे हो रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह यात्रा केवल एक नौकायन अभियान नहीं, बल्कि भारत और ओमान के बीच गहरे सभ्यतागत संबंधों का उत्सव है। मस्कट में इस पारंपरिक सिले हुए पोत का आगमन उस ऐतिहासिक मित्रता का प्रतीक है, जो समय की कसौटी पर खरी उतरी है। आईएनएसवी कौंडिन्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का जीवंत उदाहरण है, जिनके संकल्प से भारत की प्राचीन जहाज निर्माण परंपरा को पुनर्जीवित कर विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

सोनोवाल ने भारत के तेजी से विस्तार कर रहे पत्तन और समुद्री क्षेत्र में ओमानी कंपनियों के लिए निवेश के अवसरों को बताते हुए कहा कि भारत की पत्तन आधारित बुनियादी ढांचा परियोजनाएं सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत आकर्षक निवेश अवसर प्रदान करती हैं। इनमें महाराष्ट्र की वधावन पत्तन परियोजना, जिसकी अनुमानित लागत 9 अरब डॉलर और क्षमता 23 मिलियन टीईयू है, तथा तमिलनाडु की तूतीकोरिन बाह्य बंदरगाह परियोजना, जिसकी लागत 1.3 अरब डॉलर और क्षमता 4 मिलियन टीईयू है, शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्री ने भारत के 8.4 अरब डॉलर के समुद्री विकास पैकेज की जानकारी भी दी, जिसका उद्देश्य जहाज निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना है। इसमें जहाज निर्माण समूहों की स्थापना, अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहन तथा समुद्री विकास कोष की स्थापना शामिल है। साथ ही उन्होंने भारत और ओमान के बीच ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा।

उन्होंने भारत और ओमान के बीच समुद्री विरासत और संग्रहालयों से संबंधित समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के साझा समुद्री इतिहास को संरक्षित और समृद्ध करने में सहयोग मिलेगा।

पोत के स्वागत समारोह में ओमान के विरासत और पर्यटन मंत्रालय के अवर सचिव अज्जान अल बुसेदी, भारतीय नौसेना, ओमान की शाही नौसेना, रॉयल ओमान पुलिस तटरक्षक बल तथा अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीयों ने भी उत्साहपूर्वक पोत का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान भारतीय और ओमानी पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।

मस्कट प्रवास के दौरान केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ओमान के परिवहन, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सईद बिन हमूद बिन सईद अल मावली के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। बैठक में दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की गई।

उल्लेखनीय है कि पौराणिक भारतीय नाविक कौंडिन्य के नाम पर बने इस पोत में भारत की स्वदेशी समुद्री तकनीक, पारंपरिक शिल्पकला और सतत जहाज निर्माण पद्धतियों का प्रदर्शन किया गया है। यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना पर आधारित है और इसका क्रियान्वयन भारतीय नौसेना द्वारा किया गया है। पोत का निर्माण अजंता की गुफाओं में चित्रित पांचवीं शताब्दी के जहाज से प्रेरित होकर किया गया है, जिसमें धातु की कीलों के बिना सिले हुए तख्तों का उपयोग किया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर