भारत को वैश्विक प्रतिभा केंद्र बनाने के लिए कौशल अंतराल दूर करने पर मंथन

 


नई दिल्ली, 01 जून (हि.स.)। भारत को वैश्विक प्रतिभा केंद्र के रूप में मजबूत बनाने और उभरती कौशल आवश्यकताओं तथा रोजगार बाजार की मांगों के बीच अंतर को कम करने के उद्देश्य से कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय और विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने सोमवार को नई दिल्ली में ‘इंडिया स्किल्स एक्सेलरेटर’ (आईएसए) की उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक आयोजित की। बैठक में सरकार, उद्योग जगत, शिक्षाविदों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकास भागीदारों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर कौशल विकास से जुड़ी प्राथमिकताओं और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की।

‘इनसाइट टू एक्शन : ग्रोथ के लिए स्किल गैप को पाटना’ विषय पर आयोजित इस बैठक में कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी, शिक्षा एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार, अपोलो हेल्थको की कार्यकारी अध्यक्ष शोभना कमिनेनी और बजाज फिनसर्व के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजीव बजाज ने संयुक्त रूप से अध्यक्षता की। विश्व आर्थिक मंच के प्रबंध निदेशक मिरेक दुशेक भी बैठक में शामिल हुए।

जनवरी 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद शुरू किए गए इंडिया स्किल्स एक्सेलरेटर को कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय की मेजबानी में विश्व आर्थिक मंच के ग्लोबल एक्सेलरेटर नेटवर्क के तहत संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सहयोग से कौशल प्रणाली को बदलती रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना, कौशल वित्तपोषण के नवाचार मॉडल विकसित करना तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत विनिर्माण, आपूर्ति शृंखला और हरित अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों के लिए कार्यबल को तैयार करना है।

जयंत चौधरी ने कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति विश्व की सबसे बड़ी विकास शक्ति बन सकती है, बशर्ते कौशल को लगातार प्रौद्योगिकी, उद्योग और समाज की बदलती जरूरतों के अनुरूप ढाला जाए। उन्होंने कहा कि इंडिया स्किल्स एक्सेलरेटर सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और वैश्विक संगठनों के बीच सहयोग का नया मॉडल प्रस्तुत करता है, जो केवल चुनौतियों पर चर्चा नहीं बल्कि समाधान विकसित करने का मंच भी है।

डॉ. सुकांत मजूमदार ने कहा कि शिक्षा और रोजगार क्षमता के बीच गहरा समन्वय समय की आवश्यकता है। तेजी से बदलती तकनीकों के दौर में संस्थानों को विद्यार्थियों को केवल ज्ञान ही नहीं बल्कि प्रासंगिक कौशल, अनुकूलन क्षमता और आजीवन सीखने की मानसिकता भी प्रदान करनी होगी।

विश्व आर्थिक मंच की प्रबंध निदेशक सादिया ज़ाहिदी ने कहा कि भारत वैश्विक कार्यबल के भविष्य को दिशा देने की मजबूत स्थिति में है। इसके लिए सरकार, उद्योग और शिक्षा क्षेत्र के बीच प्रभावी सहयोग आवश्यक है, ताकि कौशल विकास प्रणाली आर्थिक और तकनीकी बदलावों के साथ कदम मिला सके।

बैठक में श्रम बाजार को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों की पहचान, कौशल अंतराल को दूर करने के उपायों की समीक्षा और इंडिया स्किल्स एक्सेलरेटर के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न पक्षों के साझा सहयोग पर जोर दिया गया। विचार-विमर्श के निष्कर्षों के आधार पर कार्यक्रम के क्रियान्वयन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

बैठक में अपोलो हॉस्पिटल्स, बजाज फिनसर्व, जेएसडब्ल्यू समूह, महिंद्रा समूह, आरपी-संजीव गोयनका समूह, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, विप्रो, रिलायंस फाउंडेशन, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईबीएम और रिन्यू सहित कई उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई), फिक्की, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली-एफआईटीटी, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम तथा विभिन्न मंत्रालयों और संस्थानों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर