ओम बिरला ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूह गठित किए

 


नई दिल्ली, 23 फ़रवरी (हि.स.)। भारत के संसदीय कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों के गठन की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य विश्व के विभिन्न देशों की संसदों के साथ प्रत्यक्ष, नियमित और संस्थागत संवाद को बढ़ावा देना है, ताकि पारंपरिक राजनय के साथ-साथ संसदीय स्तर पर भी द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ किया जा सके।

इन मैत्री समूहों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों को शामिल किया गया है, जो दलीय राजनीति से ऊपर उठकर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति भारत की सामूहिक प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। वरिष्ठ नेताओं में रवि शंकर प्रसाद, डॉ. एम. थंबीदुरई, पी. चिदंबरम, प्रो. राम गोपाल यादव, टीआर बालू, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, गौरव गोगोई, कनिमोझी करुणानिधि, मनीष तिवारी, डेरेक ओ’ब्रायन, अभिषेक बनर्जी, असदुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, केसी वेणुगोपाल, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, संजय सिंह, बैजयंत पांडा, शशि थरूर, निशिकांत दुबे, अनुराग ठाकुर, भर्तृहरि महताब, डी. पुरंदेश्वरी, संजय कुमार झा, हेमा मालिनी, बिप्लब कुमार देब, डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, जगदंबिका पाल, डॉ. सस्मित पात्रा, अपराजिता सारंगी, श्रीकांत एकनाथ शिंदे, पीवी मिधुन रेड्डी और प्रफुल्ल पटेल को विभिन्न देशों से संबंधित समूहों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जिन देशों के साथ मैत्री समूह गठित किए गए हैं, उनमें श्रीलंका, जर्मनी, न्यूज़ीलैंड, स्विट्ज़रलैंड, साउथ अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इज़राइल, मालदीव, अमेरिका, रूस, दक्षिण कोरिया, नेपाल, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राज़ील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इसके अतिरिक्त यूरोपीय संसद के साथ भी संसदीय संवाद को संस्थागत रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य सांसदों को अपने विदेशी समकक्षों से सीधे संवाद का अवसर प्रदान करना है। इन समूहों के माध्यम से व्यापार, प्रौद्योगिकी, कृषि, शिक्षा, संस्कृति, जलवायु परिवर्तन, सामाजिक नीतियों और वैश्विक चुनौतियों जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा। नियमित बैठकें, अध्ययन दौरे और संयुक्त कार्यक्रमों के जरिए दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

बिरला ने कहा कि संसदीय कूटनीति भारत की वैश्विक पहचान को सशक्त बनाती है और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की भूमिका को और प्रभावी बनाती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संसद से संसद और जनता से जनता के बीच संपर्क बढ़ाना समय की आवश्यकता है।

उल्लेखनीय है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विभिन्न देशों में बहुदलीय शिष्टमंडल भेजकर राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर भारत की एकजुटता का संदेश दिया था। उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए लोकसभा अध्यक्ष की यह पहल वैश्विक मंच पर भारत की सशक्त, समावेशी और संवाद-आधारित लोकतांत्रिक छवि को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

पहले चरण में 60 से अधिक देशों के साथ मैत्री समूह गठित किए गए हैं और निकट भविष्य में अन्य देशों के साथ भी ऐसे समूह स्थापित किए जाने की प्रक्रिया जारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार