भारत ने पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज होने पर गहरी चिंता जताई, एक बार फिर की शांति की अपील

 


नई दिल्ली, 03 मार्च (हि.स.)। भारत ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के तेज होने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संवाद और कूटनीति के अपने आह्वान को एक बार फिर मजबूती से दोहराया है। भारत ने कहा है कि हम संघर्ष के शीघ्र अंत के पक्ष में स्पष्ट रूप से अपनी आवाज उठाते हैं। दुर्भाग्यवश, पहले ही कई जानें जा चुकी हैं और हम इस संबंध में अपना गहरा दुख व्यक्त करते हैं।

विदेश मंत्रालय के अधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रश्न पर कहा कि सरकार मौजूदा स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है और राष्ट्रीय हित में सभी उचित निर्णय लेगी। साथ ही सरकार इस क्षेत्र की सरकारों के साथ-साथ अन्य प्रमुख साझेदारों के संपर्क में हैं। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने अपने समकक्षों के साथ चर्चा की है।

भारत ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि संघर्ष से व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति शृंखला के प्रभावित होने की संभावना है। इसके भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। वैश्विक कार्यबल में भारतीय प्रमुख भूमिका निभाते हैं। ऐसे में भारत व्यापारिक जहाजों पर हमलों का कड़ा विरोध करता है। पिछले कुछ दिनों में ऐसे हमलों के परिणामस्वरूप कुछ भारतीय नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है या लापता हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि प्रभावित देशों में भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास भारतीय नागरिकों और सामुदायिक संगठनों के साथ लगातार संपर्क में हैं और आवश्यकतानुसार नियमित रूप से सलाह जारी कर रहे हैं। उन्होंने संघर्ष में फंसे लोगों को हर संभव सहायता भी प्रदान की है। दूतावास और वाणिज्य दूतावास इस संघर्ष के विभिन्न कांसुलर पहलुओं को सुलझाने में सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे।

वक्तव्य में कहा कि 28 फरवरी को ईरान और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने पर ही भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव न बढ़ाने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था। दुर्भाग्य से, रमज़ान के पवित्र महीने में इस क्षेत्र की स्थिति लगातार और गंभीर होती जा रही है।

वक्तव्य में कहा, “हाल के दिनों में हमने न केवल संघर्ष की तीव्रता में वृद्धि देखी है, बल्कि इसका अन्य देशों में भी प्रसार हुआ है। विनाश और मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है, जबकि सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियां ठप हो गई हैं। इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एक निकटवर्ती पड़ोसी के रूप में, ये घटनाक्रम अत्यंत चिंताजनक हैं।”

प्रवक्ता ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। उनकी सुरक्षा और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ‘हम किसी भी ऐसे घटनाक्रम से बेखबर नहीं रह सकते जो उन्हें नकारात्मक रूप से प्रभावित करता हो।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा