(लीड) इंडी गठबंधन की बैठक में एसआईआर, ईवीएम और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने पर सहमति, 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में आंदोलन
नई दिल्ली, 30 सितंबर (हि.स.)। विपक्षी दलों के इंडी गठबंधन ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का फैसला किया है। गठबंधन के घटक दल 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में मार्च निकालेंगे। 06 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। गठबंधन ने ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी की।
यहां बुधवार को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में इंडी गठबंधन की आठवीं बैठक करीब तीन घंटे तक चली। बैठक में एसआईआर, ईवीएम-वीवीपैट, मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के मुद्दे पर चर्चा हुई। बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), राष्ट्रीय जनता दल, माकपा, भाकपा, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, भाकपा (माले), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस (एम), एमडीएमके, वीसीके, आरएसपी, केरल कांग्रेस (जे) और अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक सहित 20 विपक्षी राजनीतिक दल शामिल हुए।
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पत्रकार वार्ता में कहा कि गठबंधन के सभी दल इन मुद्दों पर मिलकर लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग को कठपुतली बना दिया है और भाजपा चुनाव आयोग के साथ मिलकर वोट चोरी कर रही है। चुनावों में लोगों का विश्वास बहाल करने के लिए ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराया जाना चाहिए।
खरगे ने कहा कि विपक्षी दल 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ निकालेंगे। 6 अक्टूबर को सभी विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे। साथ ही विपक्षी नेता अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगेंगे। वे राष्ट्रपति को चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों की जानकारी देंगे। इसके बाद अक्टूबर-नवंबर में पांच बड़ी रैलियां भी आयोजित की जाएंगी। इनके स्थान और तारीखों का फैसला बाद में होगा। दिल्ली में एक बड़ी रैली 1 नवंबर को आयोजित की जाएगी।
खरगे ने विपक्षी दलों के लिए छह मांगें भी रखीं। इनमें भविष्य के चुनावों में एसआईआर से पहले की मतदाता सूची का इस्तेमाल, मतदाता सूची में हर बदलाव की पूरी पारदर्शिता, किसी नाम को हटाने से पहले सूचना और अपील का अधिकार, पात्र मतदाताओं को प्रशासनिक कारणों से बाहर किए जाने से सुरक्षा, ईवीएम के बजाय बैलेट से मतदान और युवाओं के लिए सरल मतदाता पंजीकरण शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में बदलाव की पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। एसआईआर से पहले की मतदाता सूची को भविष्य के चुनावों में इस्तेमाल करने की मांग भी उन्होंने रखी। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे सूचना दी जानी चाहिए। नाम हटाने का कारण बताया जाना चाहिए। उसे प्रभावी अपील का अवसर भी मिलना चाहिए। उन्होंने प्रशासनिक खामियों, दस्तावेजों की कमी या जानकारी के अभाव के कारण पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने से सुरक्षा की मांग की।
खरगे ने दावा किया कि एसआईआर के तहत 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि नाम हटाए गए हैं तो यह भी बताया जाना चाहिए कि किसका नाम हटाया गया और क्यों हटाया गया। अनुच्छेद 324 के तहत स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव आयोग जरूरी है। मुख्य चुनाव आयुक्त के दो सहयोगी चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में 14 बार असहमति दर्ज कराई है। उन्होंने इसे मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल बताया और उनके पद से हटने की मांग की।
खरगे ने 2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से संबंधित कानून का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस कानून में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की चयन समिति में मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया है। सरकार ने चुनाव आयोग को प्रभावित करने की व्यवस्था तैयार की है। खरगे ने आरोप लगाया कि मतदाता पंजीकरण के फॉर्म-6 में बदलाव कर युवाओं के लिए पहली बार मतदाता बनने की प्रक्रिया कठिन की जा रही है। पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के पंजीकरण की प्रक्रिया सरल और सुगम होनी चाहिए।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि इंडी गठबंधन के सभी नेताओं ने लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ मिलकर लड़ने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि संबंधित व्यक्ति कितना बड़ा या प्रभावशाली है। भारतीय लोकतंत्र हर व्यक्ति से बड़ा है। विपक्षी दलों ने मिलकर देश की जनता तक यह बात पहुंचाने में सफलता हासिल की है कि चुनाव चोरी किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि युवाओं में इसे लेकर प्रतिरोध की भावना बढ़ रही है। विपक्षी दल मिलकर काम कर रहे हैं और आने वाले महीनों में देश में बड़े बदलाव लाने के लिए प्रयास करेंगे।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने दावा किया कि इंडी गठबंधन एकजुट है और सभी दल साथ हैं। उन्होंने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाए। ममता ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। ममता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव द्वारा उठाए गए ‘वोट चोरी’ के मुद्दे के बाद चुनाव प्रक्रिया पर सवाल और स्पष्ट हुए हैं।
उन्होंने मध्य प्रदेश, हरियाणा और बिहार में भाजपा की जीत तथा पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट समेत सभी स्तरों पर अपनी शिकायतें उठा चुके हैं। ज्ञानेश कुमार ने वोट चोरी की और ईवीएम से छेड़छाड़ की गई। मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। यदि इस्तीफा नहीं दिया गया तो आंदोलन को और आगे बढ़ाया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि पिछले तीन वर्षों में इंडी गठबंधन की यह 8वीं बैठक है, जबकि इस वर्ष की दूसरी बैठक है। इससे पहले 8 जून को भी विपक्षी दलों ने एसआईआर और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के मुद्दे पर बैठक की थी। उस बैठक में आम आदमी पार्टी और द्रमुक शामिल नहीं हुए थे। इस बार भी आम आदमी पार्टी और द्रमुक की ओर से कोई प्रतिनिधि बैठक में शामिल हुआ। हालांकि, एसआईआर के मुद्दे पर 28 जून को भारत के मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए विपक्षी दलों के संयुक्त पत्र पर दोनों दलों ने हस्ताक्षर किए थे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर