भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच नई तकनीकी साझेदारी, एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा फोकस

 


नई दिल्ली, 03 जून (हि.स.)। भारत और दक्षिण अफ्रीका ने बुधवार को तकनीकी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग को आपसी सहयोग की प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में चिन्हित किया है।

कर्तव्य भवन में आयोजित द्विपक्षीय बैठक में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह और दक्षिण अफ्रीका की उप विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री नोमलुंगीलो जीना के बीच समझौता हुआ। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार विभाग के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले, विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल थे। दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप मंत्री डॉ. नोमालुंगेलो जीना ने किया और इसमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार विभाग तथा दक्षिण अफ्रीकी उच्चायोग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

बैठक में

दोनों देशों ने क्वांटम तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, जीनोमिक्स, वैक्सीन अनुसंधान और हाइड्रोजन ऊर्जा में नई साझेदारियों की संभावनाओं पर चर्चा की। विज्ञान एवं शोध को उद्योग और स्टार्टअप्स से जोड़कर नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।

स्वास्थ्य तकनीक, महामारी तैयारी और किफायती चिकित्सा समाधान विकसित करने के लिए सहयोग मजबूत किया जाएगा।

दोनों देशों ने वैज्ञानिकों, शोध संस्थानों और उद्योगों के बीच संपर्क बढ़ाने का फैसला किया। इसके साथ भारत और दक्षिण अफ्रीका में एआई, डिजिटल तकनीक और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जाएगा।

इस मौके पर केन्द्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर-भौतिक प्रणाली, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और स्टार्टअप-आधारित नवाचार के क्षेत्र में भारत विश्व के सबसे तेजी से विकसित हो रहे नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि ये प्रगति दक्षिण अफ्रीका के साथ सहयोगात्मक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और नवाचार साझेदारी के नए अवसर प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि विज्ञान को तेजी से ऐसे समाधानों में परिवर्तित किया जाना चाहिए जो जीवन को बेहतर बनाएं, रोजगार सृजित करें और अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि भविष्य के सहयोग का ध्यान न केवल वैज्ञानिक उत्कृष्टता पर बल्कि प्रौद्योगिकी के उपयोग, व्यावसायीकरण और सामाजिक परिणामों पर भी केंद्रित होना चाहिए।

दक्षिण अफ्रीका की उप विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री नोमलुंगीलो जीना ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका भारत को एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में महत्व देता है और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में संस्थागत संबंधों, अनुसंधान सहयोग और नवाचार साझेदारी को मजबूत करने के लिए उत्सुक है। द्विपक्षीय वैज्ञानिक सहयोग की मजबूत नींव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने पहले ही सहयोगी अनुसंधान पहलों का व्यापक नेटवर्क स्थापित कर लिया है, जिसमें विभिन्न वैज्ञानिक विषयों में लगभग 150 सह-वित्तपोषित परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी अब उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों और नवाचार-संचालित सहयोग में महत्वपूर्ण विस्तार के लिए अच्छी स्थिति में है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी