आईआईटी खड़गपुर में वैश्विक सम्मेलन, ‘रेनेसां 2.0’ के माध्यम से सहयोगात्मक समृद्धि का आह्वान

 


कोलकाता, 24 फरवरी (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर ने मंगलवार को न्यू टाउन स्थित अपने अनुसंधान परिसर में “रेनेसां 2.0: सहयोगात्मक समृद्धि की ओर प्रबुद्ध विचारों की संसद” शीर्षक से वैश्विक सम्मेलन का आयोजन किया। यह आयोजन संस्थान के प्लेटिनम जुबली समारोह के अंतर्गत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित एक अंतरराष्ट्रीय पहल की सिल्वर जुबली के सहयोग से संपन्न हुआ।

यह पहल विश्व धर्म संसद की उस ऐतिहासिक परंपरा से प्रेरित बताई गई, जहां स्वामी विवेकानंद ने भारत की वैश्विक छवि को नई पहचान दी थी। सम्मेलन का उद्देश्य 21वीं सदी के लिए सहयोगात्मक समृद्धि, नैतिक नवाचार और आध्यात्मिक मानवतावाद पर आधारित एक नए बौद्धिक पुनर्जागरण की शुरुआत करना है।

इस विचार संसद में शासन, शिक्षा, उद्योग, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों के प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों ने भाग लिया। तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों और तकनीकी रूपांतरण के बीच मानवता के साझा भविष्य पर व्यापक मंथन किया गया। सम्मेलन में प्रतिस्पर्धा आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर सहयोग, सतत विकास और सामूहिक कल्याण पर आधारित सकारात्मक ढांचे को अपनाने पर बल दिया गया।

उद्घाटन सत्र में शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इनमें संस्थान के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती, प्रख्यात उद्योगपति हर्षवर्धन नेवोतिया, प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित अजय चक्रवर्ती तथा अन्य विशिष्ट शिक्षाविद और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल थे।

“रेनेसां 2.0” के अंतर्गत चार प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें समग्र मानव विकास को केंद्र में रखकर शिक्षा की पुनर्कल्पना, पूंजीवाद और समाजवाद से आगे बढ़कर नए आर्थिक दृष्टिकोण पर विचार, “आत्मा सहित विज्ञान” की अवधारणा के माध्यम से प्रौद्योगिकी को मानवीय दिशा देना तथा “एक मानवता” के विचार के साथ आध्यात्मिक चेतना को पुनर्जीवित करना शामिल रहा।

वक्ताओं ने कहा कि औद्योगिक और उत्तर-औद्योगिक युग की नीतियों को अब पर्यावरणीय संतुलन, समावेशी विकास और नैतिक प्रौद्योगिकी उन्नति के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता है। अल्पकालिक लाभ के स्थान पर दीर्घकालिक वैश्विक संतुलन और उत्तरदायित्वपूर्ण आचरण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।

सम्मेलन के समापन पर प्रतिनिधियों ने सहयोगात्मक अनुसंधान, नीतिगत रूपरेखा निर्माण और विभिन्न क्षेत्रों के बीच साझेदारी को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया, ताकि प्रबुद्ध विचारों को ठोस वैश्विक पहल में बदला जा सके।

इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा कि “रेनेसां 2.0” केवल तकनीकी प्रगति का नहीं बल्कि 21वीं सदी के नैतिक और बौद्धिक मार्गदर्शन का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्लेटिनम जुबली वर्ष में संस्थान शिक्षा, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और आध्यात्मिकता को एकीकृत दृष्टि के साथ जोड़ते हुए मानवता के व्यापक हित में परिवर्तनकारी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।-----

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर