आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिकों ने वेल्डिंग विज्ञान को दिया नया आयाम
-परमाणु रिएक्टर से लेकर पुलों तक की संरचनाओं को सुरक्षित व टिकाऊ बनाने पर हो रहा शोध
जोधपुर, 10 अगस्त (हि.स.)। परमाणु रिएक्टरों, ताप विद्युत संयंत्रों, अपतटीय प्लेटफॉर्म, ऊर्जा पाइपलाइनों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक संरचनाओं की मजबूती एवं दीर्घायु में वेल्डेड जोड़ की अहम भूमिका होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर के वैज्ञानिक अत्याधुनिक वेल्डिंग तकनीकों और उन्नत सामग्रियों के विकास पर शोध कर रहे हैं। यह अनुसंधान देश की महत्वपूर्ण अवसंरचना को अधिक सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
इस अनुसंधान का नेतृत्व आईआईटी जोधपुर के यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर राहुल छिब्बर कर रहे हैं। उनके वेल्डिंग एवं जॉइनिंग अनुसंधान समूह की ओर से उन्नत वेल्डिंग उपभोग्य सामग्री, नवीन जोड़ तकनीक और सामग्री अभियांत्रिकी से जुड़े समाधान विकसित किए जा रहे हैं। इनका उपयोग अति-उच्च तापमान वाले ताप विद्युत संयंत्रों, परमाणु रिएक्टरों, समुद्री संरचनाओं और रणनीतिक ऊर्जा अवसंरचना जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किया जा सकता है।
प्रोफेसर राहुल छिब्बर के अनुसार, किसी भी बड़ी संरचना की विश्वसनीयता काफी हद तक उसके जोड़ों की मजबूती पर निर्भर करती है। वेल्डिंग की सूक्ष्म संरचना को समझने और उन्नत जोड़ तकनीक विकसित करने के माध्यम से अधिक सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ अवसंरचना तैयार करना अनुसंधान का प्रमुख उद्देश्य है।
अनुसंधान समूह की ओर से उन्नत वेल्डिंग फ्लक्स और इलेक्ट्रोड आवरण विकसित किए जा रहे हैं। इनका उपयोग विभिन्न औद्योगिक वेल्डिंग प्रक्रियाओं में किया जाता है। शोधकर्ता सांख्यिकीय प्रयोगात्मक डिजाइन, पूर्वानुमान आधारित मॉडलिंग और कृत्रिम तंत्रिका तंत्र की मदद से बहु-घटक फ्लक्स प्रणालियों को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं।
इसके अलावा प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल खनिजों, जैसे लाल गेरू, का इस्तेमाल कर टिकाऊ और उच्च प्रदर्शन वाले वेल्डिंग इलेक्ट्रोड विकसित किए जा रहे हैं। वेल्ड पूल में पिघली धातु के प्रवाह और विभिन्न तत्वों के स्थानांतरण का सूक्ष्म अध्ययन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि सूक्ष्म स्तर पर होने वाले बदलाव वेल्ड की मजबूती, कठोरता और टिकाऊपन को किस तरह प्रभावित करते हैं।
आधुनिक अभियांत्रिकी में अलग-अलग प्रकार की धातुओं को आपस में जोड़ना जरूरी होता है। हालांकि, असमान धातुओं की वेल्डिंग एक जटिल प्रक्रिया है। प्रोफेसर छिब्बर का अनुसंधान समूह डुप्लेक्स स्टेनलेस स्टील, इनकोनेल जैसे निकेल आधारित सुपरएलॉय और उच्च प्रदर्शन वाली पाइपलाइन स्टील की वेल्डिंग का अध्ययन कर रहा है।
शोध में अवशिष्ट तनाव, कार्बन के स्थानांतरण और सूक्ष्म संरचनात्मक अस्थिरता जैसी चुनौतियों के समाधान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्नत इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शिकी, इलेक्ट्रॉन बैकस्कैटर विवर्तन, संक्षारण मूल्यांकन तकनीकों और परिमित तत्व मॉडलिंग आधारित संगणकीय अनुकरण के माध्यम से वेल्डेड जोड़ों की दीर्घकालिक कार्यक्षमता तथा टूटने के व्यवहार का अध्ययन किया जा रहा है।
वेल्डिंग विज्ञान के साथ प्रोफेसर छिब्बर का शोध तंतु-प्रबलित बहुलक नैनो-समग्र पदार्थों पर भी केंद्रित है। विशेष रूप से कांच तंतु प्रबलित बहुलक-मृदा नैनो-समग्र पदार्थों को समुद्री और अपतटीय वातावरण के लिए विकसित किया जा रहा है।
इस शोध का उद्देश्य ऐसे उन्नत पदार्थ और जोड़ तकनीक विकसित करना है, जो कठोर औद्योगिक, समुद्री और ऊर्जा क्षेत्र के वातावरण में लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन कर सकें। आईआईटी जोधपुर का यह अनुसंधान वेल्डिंग विज्ञान, उन्नत सामग्री और संगणकीय अभियांत्रिकी को एक साथ जोड़ते हुए देश की महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सतीश