स्वयं से ईमानदार प्रश्न करना ही सच्ची साधना: राम बहादुर राय
नई दिल्ली, 30 जुलाई (हि.स.)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने गुरुवार को कहा कि गुरु पूर्णिमा पर स्वयं से ईमानदार प्रश्न करना ही सच्ची साधना है।
अध्यक्ष राम बहादुर राय ने यह बात आज दिल्ली स्थित आईजीएनसीए के कलाकोश विभाग द्वारा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित प्रतिष्ठा दिवस पर कही। इस अवसर पर ग्रंथों का लोकार्पण और शोधपरक फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राम बहादुर राय ने कहा कि कलाकोश विभाग का यह वार्षिक आयोजन एक प्रकार का राष्ट्रीय उपनिषद बन गया है। उन्होंने कहा, जिस प्रकार चंद्रमा सूर्य के प्रकाश को प्रतिबिंबित करता है, उसी प्रकार गुरु शिष्य के जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। गुरु पूर्णिमा पर स्वयं से ईमानदार प्रश्न करना और अंतर्मन के उत्तर को मार्गदर्शक बनाना ही सच्ची साधना है।
समारोह के दौरान ज्ञान परंपरा से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रकाशनों का लोकार्पण किया गया।
इसके अलावा, निर्देशक एवं पटकथा लेखक संस्कार सुधीर देसाई की उपस्थिति में शोध आधारित फिल्म 'अष्टनायिका' का प्रदर्शन किया गया। देसाई ने बताया कि नाट्यशास्त्र की अवधारणाओं को जनसामान्य तक पहुंचाने के उद्देश्य से निर्मित यह फिल्म उनके 35 वर्षों के गहन अध्ययन का परिणाम है।
डॉ सरिता पाठक 'यजुर्वेदी' (मुख्य अतिथि) ने कहा कि कला केवल तकनीक से नहीं, बल्कि गुरु के सान्निध्य और निरंतर साधना से प्राप्त होती है। भारतीय संस्कृति में गुरु एक दिव्य तत्व हैं।
डॉ सच्चिदानंद जोशी (सदस्य सचिव, आईजीएनसीए) ने विभाग की एक वर्ष की उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि आज के दौर में ज्ञान के सही उपयोग और दिशा के बोध के लिए गुरु का सम्मान अनिवार्य है।
प्रो. ओमनाथ बिमली (सारस्वत अतिथि) ने रेखांकित किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल आधार गुरु के प्रति श्रद्धा और आत्मबोध है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी