स्वतंत्रता दिवस पर आईसीएमआर ने स्वास्थ्य अनुसंधान और चिकित्सा नवाचार को बढ़ावा देने का संकल्प दोहराया
नई दिल्ली, 15 अगस्त (हि.स.)। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने आईसीएमआर मुख्यालय में 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। इस अवसर पर इन चिकित्सकों ने चिकित्सा अनुसंधान, नवाचार और स्वास्थ्य तकनीकों को आगे बढ़ाने तथा विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने यहां आईसीएमआर मुख्यालय स्थित वी रामालिंगस्वामी भवन में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस दौरान डीएचआर की संयुक्त सचिव रिचा खोड़ा, वरिष्ठ उप महानिदेशक (प्रशासन) विवेक कुमार दक्ष समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और कर्मचारी मौजूद रहे।
इस अवसर पर डॉ. बहल ने कहा कि देश के विकास और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में स्वास्थ्य अनुसंधान और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका है। आईसीएमआर में किया जा रहा काम केवल नौकरी नहीं है बल्कि राष्ट्र निर्माण में योगदान है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा अनुसंधान, नवाचार और स्वास्थ्य तकनीकों के जरिए आईसीएमआर विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे रहा है। यह भारत को चिकित्सा अनुसंधान तथा नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
डॉ. बहल ने वैज्ञानिक उत्कृष्टता, नवाचार और स्वदेशी स्वास्थ्य तकनीकों के विकास को मजबूत और आत्मनिर्भर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए जरूरी बताया। उन्होंने आईसीएमआर से जुड़े वैज्ञानिकों और कर्मचारियों से ऐसी तकनीक और समाधान विकसित करने की अपील की, जो देश में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बेहतर करने के साथ बदलती स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा कर सकें।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए स्वदेशी तकनीकों का विकास जरूरी है। चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से देश को भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में लगातार काम किया जाना चाहिए।
स्वतंत्रता दिवस समारोह के तहत पुरस्कार वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें इस महीने की शुरुआत में आयोजित निबंध लेखन और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य डीएचआर-आईसीएमआर के अधिकारियों और कर्मचारियों में रचनात्मकता, ज्ञान, सक्रिय भागीदारी और संस्थागत गतिविधियों के प्रति जुड़ाव को बढ़ावा देना था।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर