आईसीएआर की 97वीं वार्षिक आम बैठक में रोडमैप तैयार, कृषि अनुसंधान को किसान-केंद्रित बनाने पर जोर

 


नई दिल्ली, 18 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य कृषि क्षेत्र को विकसित किए बिना हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कृषि अनुसंधान को किसानों, बाजार और उपभोक्ताओं की जरूरतों के अनुरूप बनाने तथा प्रयोगशाला में विकसित तकनीक को तेजी से खेतों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर ) की 97वीं वार्षिक आम बैठक की अध्यक्षता करते हुए चौहान ने कहा कि अब केवल खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। भारत को खेत से वैश्विक बाजार तक अपनी मजबूत पहचान बनानी होगी। उन्होंने कहा कि अनुसंधान का वास्तविक मूल्य तभी है, जब उसका समाधान सही समय पर किसान तक पहुंचे और उसका प्रत्यक्ष एवं मापने योग्य लाभ दिखाई दे।

एकीकृत खेती से आय बढ़ाने पर जोर

कृषि मंत्री ने छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को जोड़ने पर जोर दिया। उनके अनुसार इससे किसानों की आय के स्रोत बढ़ेंगे, लागत घटेगी और सालभर आमदनी का अवसर मिलेगा।

उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज एवं रोपण सामग्री की समय पर उपलब्धता, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को भी प्राथमिकता देने की बात कही।

आईसीएआर-उद्योग साझेदारी मजबूत करने की जरूरत

शिवराज सिंह चौहान ने कृषि तकनीकों को प्रयोगशाला से खेत तक पहुंचाने में आईसीएआर और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि नवाचार केवल विचार या शोधपत्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे व्यावहारिक समाधान और जमीनी प्रभाव में बदलना जरूरी है।

उन्होंने वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, किसानों और उद्योग जगत के बीच संवाद बढ़ाने तथा अनुसंधान के लक्ष्यों को स्पष्ट प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

आईसीएआर

के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एमएल जाट ने परिषद की उपलब्धियां प्रस्तुत कीं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में 386 नई फसल किस्में जारी की गईं। इनमें 94 प्रतिशत जलवायु-प्रतिरोधी और 29 प्रतिशत जैव-संवर्धित किस्में हैं।

उन्होंने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में करीब 19 मिलियन टन की वृद्धि हुई है। जीनोमिक्स, जीनोम एडिटिंग, पशुधन स्वास्थ्य, मत्स्य पालन, मृदा स्वास्थ्य और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

डॉ. जाट के अनुसार पिछले वर्ष करीब 805 बौद्धिक संपदा आवेदन दाखिल किए गए, जबकि 36 संस्थानों में प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण को मजबूत किया गया।

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि 2014 के बाद कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अब अगली प्राथमिकता कृषि में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। उन्होंने दलहन, तिलहन, बीज, पशुधन और मूल्यवर्धित प्रसंस्करण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया।

उन्होंने जलवायु-अनुकूल कृषि, मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देने के साथ किसानों की आय बढ़ाने के लिए किसान उत्पादक संगठनों को मजबूत करने की जरूरत बताई।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कृषि, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कृषि के साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और मुर्गी पालन के अधिक एकीकरण पर जोर दिया।

बैठक में आईसीएआर की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 और वर्ष 2024-25 के वार्षिक खाते प्रस्तुत किए गए। कृषि अनुसंधान एवं विकास के लिए उद्योग और सीएसआर दाताओं के साथ साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए। बैठक में आईसीएआर के चार प्रकाशन जारी किए गए और परिषद के नियमों एवं उपनियमों में संशोधन पर भी विचार किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी