पहली बार भारत पहुंचे जापान के फाइटर जेट्स, युद्धाभ्यास ‘वीर गार्जियन’ में लेंगे हिस्सा
- राजनाथ ने फाइटर जेट्स भेजने को भारत-जापान डिफेंस पार्टनरशिप के लिए बड़ा मील का पत्थर बताया
नई दिल्ली, 10 सितंबर (हि.स.)। भारत और जापान की वायु सेनाओं के बीच जोधपुर में चल रहे संयुक्त हवाई अभ्यास ‘वीर गार्जियन’ में हिस्सा लेने के लिए जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के तीन फाइटर जेट्स एफ-2 पहुंच गए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोधपुर में हो रहे युद्ध अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए जापान के फाइटर एयरक्राफ्ट भेजने को भारत-जापान डिफेंस पार्टनरशिप के लिए बड़ा मील का पत्थर बताया। उन्होंने गुरुवार को कहा कि जापान के फाइटर एयरक्राफ्ट का पहला भारत दौरा इंडो-पैसिफिक में शांति और स्थिरता के लिए बढ़ते भरोसे और साझी प्रतिबद्धता का संकेत है।
रक्षा मंत्री ने पिछले महीने नई दिल्ली में अपने जापानी समकक्ष के साथ हुई बातचीत को याद किया और बताया कि एक्सरसाइज वीर गार्डियन जैसे दौरों का आपसी आदान-प्रदान इस तालमेल को और मजबूत करता है। जापानी वायु सेना के फाइटर एयरक्राफ्ट के साथ यह भारत का दूसरा हवाई अभ्यास है। इससे पहले 2023 में भारत के फाइटर एयरक्राफ्ट ने पहली बार जापान का दौरा किया था। उस समय भारत की टुकड़ी ने 4 सुखोई-30 एमकेआई विमानों के साथ भाग लिया था। पहले संस्करण में भारत और जापान की वायु सेनाओं ने 16 दिनों तक हवाई अभ्यास 'वीर गार्जियन' के दौरान एक-दूसरे से अनूठी क्षमताएं सीखीं थीं।
भारतीय वायु सेना ने द्विपक्षीय युद्धाभ्यास 'वीर गार्डियन' के लिए जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के तीन एफ-2 फ़ाइटर जेट्स जोधपुर पहुंचने पर स्वागत किया। जॉइंट एयर डिफेंस ड्रिल्स के लॉन्च की घोषणा करते हुए वायु सेना ने इस इंगेजमेंट के स्ट्रेटेजिक मकसद पर जोर दिया। एयर फोर्स स्टेशन जोधपुर में यह अभ्यास 22 सितंबर तक चलेगा। भारत की ओर से अलग-अलग तरह के फ्रंटलाइन कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हिस्सा लेंगे, जिसमें स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल शामिल हैं। चौदह दिन की एक्सरसाइज के दौरान हिस्सा लेने वाले एयर वॉरियर्स एडवांस्ड ऑपरेशनल मिशन करेंगे और प्रोफेशनल बातचीत करेंगे।
जोधपुर में भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों के साथ जापानी विमान भी हवाई अभियानों का अभ्यास करेंगे। दोनों देशों के वायु योद्धाओं को एक साथ काम करने और अलग-अलग ऑपरेशनल परिस्थितियों में तालमेल बनाने का मौका मिलेगा। अभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाएं अलग-अलग अभियानों में साथ काम करेंगी। इससे इंटरऑपरेबिलिटी यानी दोनों सेनाओं की एक-दूसरे के साथ मिलकर प्रभावी तरीके से काम करने की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही युद्धक क्षमताओं और आपसी समझ को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। यह अभ्यास परिचालन तालमेल बढ़ाने, कौशल को और निखारने तथा दोनों देशों के बीच आपसी समझ को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत निगम