औषधि नियमों में संशोधन, मनगढ़ंत आंकड़े और दस्तावेज देने वाले आवेदकों पर होगी कार्रवाई

 

नई दिल्ली, 06 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन अधिसूचित किया है। नए प्रावधानों के तहत फर्जी या मनगढ़ंत आंकड़े और दस्तावेज प्रस्तुत करने वाले आवेदकों के भविष्य के आवेदन निर्धारित अवधि तक स्वीकार नहीं किए जाएंगे। संशोधन का उद्देश्य औषधि विनियामक प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता को मजबूत करना है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यह संशोधन 16 अक्टूबर, 2025 की जीएसआर संख्या 756 (ई) के माध्यम से अधिसूचित किया गया है। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के मौजूदा प्रवर्तन प्रावधानों के अतिरिक्त अब लाइसेंसिंग प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि फर्जी अथवा मनगढ़ंत आंकड़े या दस्तावेज प्रस्तुत करने वाली संस्था के नए आवेदन निर्धारित अवधि तक स्वीकार न किए जाएं। यह व्यवस्था औषधि नियम, 1945 के विभिन्न प्रावधानों के तहत दायर सभी प्रकार के आवेदनों पर लागू होगी। कार्रवाई से पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा तथा अपील का भी प्रावधान रहेगा।

मंत्रालय ने कहा कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और विश्वसनीय आंकड़े ही औषधियों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता के मूल्यांकन का आधार होते हैं। फर्जी आंकड़े न केवल नियामक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं बल्कि जन-स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। संशोधन का उद्देश्य ऐसे दुराचार को हतोत्साहित करना और औषधियों की स्वीकृति को वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित बनाना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा