गुजरात के राजकोट रणजीत विलास पैलेस में क्षत्रिय महिलाओं का शौर्य रास, दिखी सांस्कृतिक विरासत

 










- 200 क्षत्रिय महिलाओं ने तलवारों से किया प्रदर्शन, बाइक-खुली जीप पर खड़े होकर की तलवारबाजी

राजकोट, 13 अक्टूबर (हि.स.)| नवरात्रि शक्ति की पूजा, परंपरा और भक्ति का त्योहार है। इस त्योहार पर गुजरात के राजकोट में क्षत्रिय समुदाय की महिलाओं और बेटियों ने सोमवार रात पारंपरिक तलवार रास पेश करके शौर्य और शक्ति की पूजा का एक अनोखा नजारा पेश किया।

राजकोट शहर के पैलेस रोड स्थित ऐतिहासिक रणजीत विलास पैलेस में नवरात्रि रासोत्सव 2026 के तहत भगिनी सेवा फाउंडेशन द्वारा दो दिवसीय तलवार रास का किया गया, जिसमें 200 से ज़्यादा क्षत्रिय महिलाओं और बेटियों ने हिस्सा लिया। बीती रात कार्यक्रम में पारंपरिक तलवार रास के साथ-साथ महिलाओं और बेटियों ने टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर पर भी तलवार रास किया। हथियारों के साथ किए गए इस प्रदर्शन में क्षत्रिय परंपरा और भगवती की पूजा का मेल देखने को मिला। इसमें तलवार रास के अलावा, दिवाड़ा रास और थाली रास सहित विभिन्न पारंपरिक रास भी किए गए।

नवरात्रि के पावन अवसर पर राजकोट के रणजीत विलास पैलेस में क्षत्रिय समाज की बहनों द्वारा डीजे या आधुनिक गरबा के बजाय प्राचीन परंपरा को जीवित रखते हुए बहनों ने बाइक और खुली जीप पर धारदार तलवारों के साथ रास किया और उपस्थित सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। तलवार रास के अलावा बहनों ने दिवाड़ा रास, थाली रास और टिप्पणी रास भी किया। नवरात्रि के दौरान रणजीत विलास पैलेस में वर्ष 2006 से तलवार रास का आयोजन किया जा रहा है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी उत्सव के दूसरे और तीसरे दिन विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राजकोट राज्य की रानी साहेबा महारानी कादंबरीदेवी ने कहा कि हम ब्रह्मचारिणी भगवती देवी की पूजा करते हैं और यह कार्यक्रम उन्हीं को याद करके शुरू हो रहा है। यह कार्यक्रम खस भगिनी सेवा फाउंडेशन की बहनों द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जो सभी क्षत्रिय बहनों ने आयोजित किया है।

संगठन के साथ-साथ क्षत्रिय बहनें भी मेहनत और इंतज़ाम कर रही हैं।

महारानी कादंबरीदेवी ने कहा कि आप देखेंगे कि वे हर तरह के स्टंट करती हैं, आपको स्टंट देखने में बहुत आसान लगेंगे, लेकिन असल में उनके पीछे कड़ी मेहनत होती है। उन्होंने एक महीने से इसकी ट्रेनिंग ली है और इसका प्रदर्शन किया।

समाज को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य रास तलवार रास है। हमारी इस दिव्य कला और संस्कृति को आदर और सम्मान मिलना चाहिए। आप इस ग्राउंड पर देखेंगे कि हमारे क्षत्रिय समाज की बहनें कैसे अपनी संस्कृति की रक्षा करने के लिए पूरे जोश और उत्साह के साथ प्रदर्शन कर रही हैं।

देवयानीबा झाला ने कहा कि हर साल नवरात्रि की तरह इस बार भी महल के अंदर यह रास कार्यक्रम किया जा रहा है। मुझे भी इसमें हिस्सा लेकर बहुत खुशी हो रही है। हमें यहां कई रास सिखाए जाते हैं, जिनमें से मैंने दिवाड़ा रास, प्रॉप रास में हिस्सा लिया है और कारों में जो स्टंट होते हैं, उनमें भी मैंने हिस्सा लिया है। प्रैक्टिस के लिए, वहां जो लीडर हैं, वे हमें बहुत अच्छे से सपोर्ट करते हैं और हमें हर तरह से व्यवस्थित तरीके से सिखाते हैं, इसलिए यह हो जाता है। प्रैक्टिस महीनों से चल रही थी।

गौरतलब है कि भगिनी सेवा फाउंडेशन पिछले 15 सालों से हेरिटेज वॉक, साफा बनाने की ट्रेनिंग, पर्यावरण के प्रति जागरूकता और सैनिकों को इको-फ्रेंडली राखियां भेजने जैसी गतिविधि कर रही है। फाउंडेशन ने बाइक पर तलवार रास सिखाने के लिए एक खास कैंप लगाया। चार साल पहले क्षत्रिय समाज की हजारों बहनों ने एक साथ तलवार रास खेलकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।_____________

हिन्दुस्थान समाचार / हर्ष शाह