देश में भूजल रिचार्ज दोहन से ज्यादा, दो करोड़ से ज्यादा जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज के काम, 69 हजार अमृत सरोवर बने

 


नई दिल्ली, 10 अगस्त (हि.स.)। देश में बारिश और दूसरे प्राकृतिक स्रोतों से हर साल करीब 449 अरब घन मीटर (बीसीएम) भूजल रिचार्ज होता है। इसमें से खेती, घरों और उद्योगों के लिए करीब 247 अरब घन मीटर भूजल निकालकर इस्तेमाल में लाया जाता है। हालांकि देश के कई राज्यों और जिलों में भूजल का इस्तेमाल राष्ट्रीय औसत से कहीं ज्यादा है, जिससे वहां भूजल स्तर पर दबाव बना हुआ है। हालांकि देशभर में जल शक्ति अभियान के तहत अब तक दो करोड़ से अधिक जल संरक्षण और कृत्रिम भूजल रिचार्ज के काम किए जा चुके हैं। वहीं, जल संचय जन भागीदारी पहल के तहत 1.55 करोड़ से अधिक भूजल रिचार्ज और जल भंडारण के काम पूरे हुए हैं, जबकि अमृत सरोवर योजना के तहत करीब 69 हजार जलाशयों को विकसित या पुनर्जीवित किया जा चुका है।

जल शक्ति मंत्रालय के केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की 2025 की भूजल संसाधन आकलन रिपोर्ट के मुताबिक, देश में हर साल कुल 449 बीसीएम भूजल रिचार्ज होता है। इसमें से करीब 408 बीसीएम पानी ऐसा है जिसे अलग-अलग जरूरतों के लिए निकाला जा सकता है। इसमें से देश में सभी तरह के इस्तेमाल के लिए 247 बीसीएम भूजल निकाला जाता है।

बारिश का पानी जमीन पर गिरने के बाद उसका एक हिस्सा मिट्टी और चट्टानों की परतों से नीचे चला जाता है और जमीन के अंदर जमा होता रहता है। इसे भूजल रिचार्ज कहा जाता है। इसी भूजल को कुओं, ट्यूबवेल और दूसरे साधनों के जरिए निकालकर खेती, पीने के पानी, घरेलू जरूरतों और उद्योगों में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि बारिश से जमीन के अंदर पहुंचने वाला पूरा पानी इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं होता। इसी वजह से 449 बीसीएम के कुल रिचार्ज के मुकाबले 408 बीसीएम को वार्षिक निकासी योग्य भूजल संसाधन माना गया है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न का जवाब देते हुए बताया कि देश में निकाले जाने वाले 247 बीसीएम भूजल का सबसे बड़ा हिस्सा खेती में इस्तेमाल होता है। कुल भूजल निकासी में से करीब 215 बीसीएम यानी 87 प्रतिशत पानी सिंचाई के काम आता है। वहीं 28 बीसीएम यानी 11 प्रतिशत पानी घरेलू जरूरतों और पीने के पानी के लिए इस्तेमाल होता है। उद्योगों में करीब 4 बीसीएम यानी 2 प्रतिशत भूजल इस्तेमाल होता है। इससे साफ है कि देश में भूजल पर सबसे ज्यादा दबाव खेती और सिंचाई की जरूरतों का है।

केंद्रीय भूजल बोर्ड के मुताबिक, देश में भूजल निकासी का स्तर 60.63 प्रतिशत है। एक साल में जितना भूजल निकाला जा सकता है, उसकी तुलना में करीब 61 प्रतिशत पानी निकाला जा रहा है। हालांकि यह औसत पूरे देश की स्थिति बताता है और अलग-अलग राज्यों तथा जिलों में स्थिति काफी अलग है।

देश के नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भूजल निकासी का स्तर राष्ट्रीय औसत 60.63 प्रतिशत से ज्यादा है। इनमें पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पुडुचेरी, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ और कर्नाटक शामिल हैं। जिला स्तर पर देखें तो देश के 281 जिलों में भूजल निकासी का स्तर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा पाया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भूजल की गुणवत्ता भी अलग-अलग क्षेत्रों में अलग है। देश में सामान्य तौर पर भूजल पीने योग्य है और करीब 99 प्रतिशत निगरानी केंद्रों पर भूजल सिंचाई के लिए उपयुक्त पाया गया है। हालांकि कुछ इलाकों में फ्लोराइड, नाइट्रेट, लवणता और दूसरे तत्वों की समस्या है। भूजल की गुणवत्ता अलग-अलग इलाकों की भूगर्भीय और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है, इसलिए राज्यों या जिलों को केवल 'सबसे खराब भूजल गुणवत्ता' के आधार पर रैंक नहीं किया जाता।

बिहार के आंकड़ों में भी कुछ इलाकों में भूजल में लवणता, फ्लोराइड और नाइट्रेट की समस्या सामने आई है। वर्ष 2025 में बिहार से लिए गए 584 भूजल नमूनों की जांच में पांच नमूनों में विद्युत चालकता निर्धारित सीमा से ज्यादा मिली। वहीं 39 नमूनों में फ्लोराइड और 78 नमूनों में नाइट्रेट निर्धारित सीमा से ज्यादा पाया गया।

भूजल को बचाने और दोबारा जमीन के अंदर पहुंचाने के लिए देशभर में बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। जल शक्ति अभियान के तहत अब तक दो करोड़ से अधिक जल संरक्षण और कृत्रिम भूजल रिचार्ज के काम किए जा चुके हैं। बिहार में भी करीब 5.75 लाख ऐसे काम हुए हैं।

इसके अलावा 2024 में शुरू की गई जल संचय जन भागीदारी पहल के तहत देश में 1.55 करोड़ से अधिक कृत्रिम भूजल रिचार्ज और जल भंडारण के काम पूरे किए गए हैं। इनमें बिहार के करीब 7.26 लाख काम शामिल हैं। इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए 1 जून 2026 को जल संचय जन भागीदारी-कैच द रेन अभियान शुरू किया गया है, जिसका जोर बारिश के पानी को बचाने और उसे जमीन के अंदर पहुंचाने पर है।

देशभर में पानी के भंडारण और भूजल रिचार्ज को बढ़ाने के लिए अमृत सरोवर योजना के तहत भी काम किया जा रहा है। अब तक करीब 69 हजार अमृत सरोवर विकसित या पुनर्जीवित किए जा चुके हैं। इनमें बिहार के 2,613 अमृत सरोवर शामिल हैं। इन जलाशयों में बारिश का पानी जमा होने से स्थानीय स्तर पर पानी की उपलब्धता बढ़ने के साथ भूजल रिचार्ज में भी मदद मिलती है।

जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार देश में औसतन प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता भी घट रही है। केंद्रीय जल आयोग के 2024 के आकलन के मुताबिक वर्ष 2021 में देश में औसत वार्षिक प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 1,573.19 घन मीटर थी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर