आध्यात्मिक जागरण और राष्ट्र निर्माण में गायत्री परिवार का योगदान अमूल्य: ओम बिरला

 


नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (हि.स.)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को शताब्दी समारोह 2026 के अवसर पर आध्यात्मिक विभूतियों आचार्य श्रीराम शर्मा और माता भगवती देवी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि गायत्री परिवार का यह शताब्दी समारोह केवल अतीत को स्मरण करने का अवसर नहीं है बल्कि एक ऐसी सृजनात्मक क्रांति का उत्सव है, जिसने देशभर में असंख्य लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।

ओम बिरला ने आज दिल्ली में गायत्री परिवार की ओर से आयोजित शताब्दी समारोह के दौरान यह बात कही। इस दौरान उन्होंने राष्ट्र की आध्यात्मिक चेतना के जागरण, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण में आचार्य श्रीराम शर्मा और माता भगवती देवी के अमूल्य योगदान का स्मरण किया।

बिरला ने कहा, “ आचार्य ने अखंड ज्योति के माध्यम से देशभर में आध्यात्मिक चेतना का प्रकाश फैलाया और व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण, समाज निर्माण तथा राष्ट्र निर्माण के आदर्शों से लोगों को प्रेरित किया। उनका प्रेरणादायी संकल्प, “हम बदलेंगे, युग बदलेगा” देश और दुनिया के लोगों के लिए एक मूल मंत्र बन गया। गायत्री मंत्र और यज्ञ के माध्यम से आचार्य ने लोगों को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ा तथा अंतर्मन की शुद्धता और आत्मिक जागरण का मार्ग प्रशस्त किया।

गायत्री परिवार के साथ अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने दूर-दराज के गांवों और ढाणियों में भी आचार्य के आध्यात्मिक दर्शन का परिवर्तनकारी प्रभाव देखा है। इस दर्शन ने कठिन परिस्थितियों, अंधविश्वासों और हानिकारक सामाजिक कुरीतियों से उबरने में लोगों का मार्गदर्शन किया। इस आंदोलन ने न केवल लोगों के सामाजिक जीवन में बदलाव लाया बल्कि उनके व्यक्तित्व विकास, चरित्र निर्माण और समाज तथा राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ किया।

उन्होंने कहा कि माता का योगदान केवल आध्यात्मिक जागरण तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने सामाजिक परिवर्तन और महिला सशक्तीकरण के एक महत्वपूर्ण आंदोलन का नेतृत्व किया। यह वह समय था, जब देशभर की महिलाएं अनेक सामाजिक चुनौतियों और कुरीतियों का सामना कर रही थीं। माता ने महिलाओं को शिक्षा ग्रहण करने, आत्मविश्वास विकसित करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। उनका जीवन और उनकी शिक्षाएं इस बात का प्रमाण हैं कि परिवार में महिला के व्यक्तित्व का विकास पूरे परिवार और समाज की प्रगति का आधार बनता है। उनके मातृत्व और वात्सल्यपूर्ण मार्गदर्शन ने असंख्य महिलाओं के जीवन को परिवर्तित किया तथा उनके सामाजिक एवं आध्यात्मिक सशक्तीकरण को नई गति प्रदान की। महिला सशक्तीकरण की यह दृष्टि आज देश में संचालित विभिन्न पहलों में भी परिलक्षित होती है। आध्यात्मिक चेतना और भारतीय संस्कारों पर आधारित वातावरण सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने, परिवारों को सुदृढ़ बनाने और प्रगतिशील समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा के प्रारंभिक चरण से ही वहां आध्यात्मिकता, सांस्कृतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण पर दिया जाने वाला बल सराहनीय है। उन्होंने कहा कि आज जब अनेक देशों में लोग तनाव और अवसाद का सामना कर रहे हैं, तब आंतरिक शांति, आध्यात्मिक शक्ति और उद्देश्यपूर्ण जीवन का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो गया है। यह अभियान तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन न आ जाए। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता, धर्म, संस्कृति, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण के आदर्श इस प्रयास के केंद्र में बने रहने चाहिए।

बिरला ने कहा कि आचार्य श्रीराम शर्मा जी और माता भगवती देवी जी द्वारा प्रज्वलित आध्यात्मिक ऊर्जा और चेतना इसी प्रकार जन-जीवन को आलोकित करती रहेगी तथा एक समरस, जागरूक और विकसित समाज की नींव को सुदृढ़ करती रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी