विदेशों में 'असमय' रथयात्रा पर गजपति महाराजा ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग

 


भुवनेश्वर, 07 जुलाई (हि.स.)। पुरी के गजपति महाराजा एवं श्रीजगन्नाथ मंदिर के पारंपरिक प्रथम सेवक दिव्यसिंह देव ने विदेशों में अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) द्वारा भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा और रथयात्रा पारंपरिक तिथियों से अलग समय पर आयोजित किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अलग-अलग पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने तथा भगवान जगन्नाथ की परंपराओं और शास्त्रोक्त धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

चार जुलाई, 2026 को भेजे गए पत्रों में गजपति महाराजा ने कहा कि इस्कॉन विभिन्न देशों में भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा और रथयात्रा का आयोजन उन तिथियों से अलग कर रहा है, जो सनातन वैदिक परंपरा और श्रीजगन्नाथ संप्रदाय में शास्त्रसम्मत रूप से निर्धारित हैं। उनके अनुसार, इस प्रकार के आयोजनों से भारत और विदेशों में रहने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं, विशेषकर ओड़िया समुदाय की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो रही हैं। साथ ही, भगवान जगन्नाथ की परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को लेकर भ्रम की स्थिति भी उत्पन्न हो रही है।

गजपति महाराजा ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि वह इस विषय को पहले भी केंद्र सरकार और राष्ट्रपति के समक्ष उठा चुके हैं। उन्होंने बताया कि 24 अक्टूबर, 2025 को उन्होंने प्रधानमंत्री को तथा 20 अप्रैल, 2026 को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अपनी चिंता व्यक्त की थी। इस बार भेजे गए पत्रों के साथ उन्होंने अपने पूर्व पत्रों की प्रतियां और विदेशों में आयोजित अथवा प्रस्तावित स्नान यात्राओं एवं रथयात्राओं की सूची भी संलग्न की है, जिन पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई है।

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में भारत के बाहर कई देशों में पारंपरिक तिथियों से अलग समय पर भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा और रथयात्रा आयोजित की गई है तथा आने वाले महीनों में भी ऐसे कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज, विशेषकर ओड़िया समुदाय के विभिन्न संगठनों और श्रद्धालुओं द्वारा लगातार आपत्ति जताए जाने के बावजूद इस प्रकार के आयोजन जारी हैं, जिससे विश्वभर में भगवान जगन्नाथ की प्राचीन परंपराओं के संबंध में गलत संदेश जाने की आशंका है।

गजपति महाराजा ने कहा कि सनातन वैदिक परंपरा में भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा, रथयात्रा और अन्य प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों का समय, तिथि तथा विधि-विधान शास्त्रों और प्राचीन परंपराओं के अनुसार निर्धारित हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि विभिन्न पीठों के शंकराचार्यों और वैष्णवाचार्यों ने भी समय-समय पर यह मत व्यक्त किया है कि इन धार्मिक उत्सवों का आयोजन केवल निर्धारित शास्त्रोक्त तिथियों पर ही होना चाहिए, ताकि उनकी आध्यात्मिक गरिमा और धार्मिक पवित्रता अक्षुण्ण बनी रहे।

उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि इस विषय पर संबंधित पक्षों के साथ संवाद स्थापित कर आवश्यक हस्तक्षेप किया जाए तथा भगवान जगन्नाथ की परंपराओं, धार्मिक मर्यादा और पवित्र उत्सवों की शास्त्रोक्त समय-सारिणी की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि यह केवल ओडिशा या ओड़िया समाज का विषय नहीं है, बल्कि भगवान जगन्नाथ में आस्था रखने वाले देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और सनातन परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है।

उल्लेखनीय है कि पुरी के गजपति महाराजा श्रीजगन्नाथ मंदिर के पारंपरिक प्रथम सेवक माने जाते हैं और रथयात्रा सहित मंदिर की अनेक प्रमुख धार्मिक परंपराओं में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इससे पहले भी वह विदेशों में परंपरागत तिथियों से अलग समय पर आयोजित होने वाली स्नान यात्राओं और रथयात्राओं पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जता चुके हैं। उनका यह मत रहा है कि भगवान जगन्नाथ से जुड़े सभी प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन शास्त्रों और परंपराओं में निर्धारित तिथियों तथा विधि-विधान के अनुसार ही होना चाहिए, ताकि उनकी मूल धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित बनी रहे।

-------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता महंतो