जल संरक्षण जनआंदोलन बने, तभी आत्मनिर्भर होगा विदर्भ : नितिन गडकरी

 


नई दिल्ली, 10 मई (हि.स.)। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि विदर्भ को किसान आत्महत्या क्षेत्र की पहचान से बाहर निकालने और गांवों में जल समृद्धि लाने के लिए जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देश में पानी की कमी नहीं है, बल्कि जल संसाधनों की उचित योजना और प्रबंधन का अभाव है।

गडकरी रविवार को नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर 17 और 18 मई को नागपुर में ‘जलसंवाद’ और ‘जलक्रांति’ सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर विधायक चरणसिंह ठाकुर और उमेश यादवकर भी उपस्थित रहे।

गडकरी ने कहा कि जैविक खेती, ड्रिप सिंचाई और कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से जल प्रबंधन को प्रभावी बनाया जा सकता है। खेत तालाबों से निकली मिट्टी का राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में उपयोग किए जाने से पश्चिमी विदर्भ के अकोला, वाशिम और बुलढाणा जिलों में भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिली है। साथ ही किसानों ने अपनी फसल पद्धति में भी बदलाव किया है।

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन जनभागीदारी उससे भी अधिक आवश्यक है। वरुड-मोर्शी और काटोल-नरखेड़ जैसे भूजल संकट वाले ‘डार्क जोन’ क्षेत्रों में जनसहभागिता से नदी और नालों के गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। इन प्रयासों के माध्यम से जल संरक्षण परियोजनाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने स्थानीय स्वशासी संस्थाओं से भी इन अभियानों में सक्रिय सहयोग देने की अपील की।

गडकरी ने बताया कि पूर्ति सिंचन समृद्धि कल्याणकारी संस्था पिछले 25 वर्षों से जल संरक्षण के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही है। संस्था द्वारा विकसित ‘तामसवाड़ा मॉडल’ को देशभर में पहचान मिली है। संस्था के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 17 मई को सिविल लाइंस स्थित डॉ. वसंतराव देशपांडे सभागार में शाम चार बजे ‘नागपुर जलसंवाद-2026’ राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होगा। इस सम्मेलन का विषय ‘किसान आत्महत्या मुक्त विदर्भ के समाधान के रूप में जल संरक्षण’ रखा गया है। इसमें जल संकट और सिंचाई समस्याओं के समाधान पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, ताकि किसानों को आर्थिक स्थिरता मिल सके।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नितिन गडकरी करेंगे। सम्मेलन में देहरादून के डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, चित्रकूट के उमाशंकर पांडे और सहारनपुर के सेठपाल सिंह विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके अलावा असम के केशोब कृष्ण चात्रधारा, सेंटर फॉर वाटर पीस के संजय कश्यप, नागालैंड की जल विशेषज्ञ स्वेडेविनो नात्सो तथा राज्य मंत्री आशीष जायसवाल और डॉ. पंकज भोयर भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।

18 मई को सुबह 11 बजे रेशिमबाग स्थित कविवर्य सुरेश भट सभागार में ‘जलक्रांति सम्मेलन’ आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में संस्था के 25 वर्षों के कार्यों की समीक्षा की जाएगी और विदर्भ में लागू ‘तामसवाड़ा पैटर्न’ जैसे जल संरक्षण अभियानों पर विशेष चर्चा होगी।

सम्मेलन में अभिनेता और पानी फाउंडेशन के संस्थापक आमिर खान, नाम फाउंडेशन के अध्यक्ष नाना पाटेकर और सचिव मकरंद अनासपुरे विशेष आकर्षण होंगे। इसके अलावा महाराष्ट्र के मृदा एवं जल संरक्षण मंत्री संजय राठौड़, डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ के कुलपति डॉ. शरद गडाख तथा गोंडवाना विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रशांत बोकारे भी कार्यक्रम में भाग लेंगे।

मुख्य कार्यक्रम के बाद 18 मई को दोपहर 2:30 बजे जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण पर विस्तृत विचार-विमर्श भी आयोजित किया जाएगा। इसमें संस्था द्वारा पिछले ढाई दशकों में किए गए कार्यों की समीक्षा की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर