सड़क व बुनियादी ढांचे पर 100 रुपये खर्च से अर्थव्यवस्था पर 325 रुपये का प्रभाव : गडकरी

 




नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सड़क और बुनियादी ढांचे पर खर्च का अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर 100 रुपये खर्च करने से अर्थव्यवस्था और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर 325 रुपये के बराबर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि मजबूत बुनियादी ढांचे, पर्याप्त बिजली और पानी के बिना कृषि, उद्योग, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना संभव नहीं है।

गडकरी मंगलवार को यहां भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के राष्ट्रीय सम्मेलन ‘हाईवेज ऑफ इंडियाज फ्यूचर : स्मार्ट, सेफ एंड सस्टेनेबल’ में शामिल हुए। उन्होंने सड़क निर्माण, आर्थिक विकास, लॉजिस्टिक्स लागत, निर्माण की गुणवत्ता और वैकल्पिक ईंधन से जुड़ी योजनाओं का ब्योरा दिया।

उन्होंने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लॉजिस्टिक्स लागत घटाना जरूरी है। दो वर्ष पहले चीन में लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी की करीब आठ फीसदी थी, जबकि भारत में यह 16 फीसदी थी। इस अंतर को कम करने के लिए देश में ग्रीन एक्सप्रेसवे और दो से छह लेन तक की सड़कों का नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के दौरान देश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 91,287 किलोमीटर थी, जो वर्ष 2014 से 2026 के बीच बढ़कर 1,46,572 किलोमीटर हो गई। चार लेन और उससे अधिक चौड़ी सड़कों की लंबाई 18,278 किलोमीटर से बढ़कर 49,260 किलोमीटर पहुंच गई है। हाई-स्पीड कॉरिडोर नेटवर्क भी 557 किलोमीटर से बढ़कर 6,788 किलोमीटर हो गया है।

उन्होंने कहा कि असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 22 हजार करोड़ रुपये की लागत से रेल और सड़क की संयुक्त सुरंग बनाई जा रही है। अगले पांच से सात वर्षों में जलविद्युत, मेट्रो और राजमार्गों से जुड़ी सात से आठ लाख करोड़ रुपये की सुरंग परियोजनाएं विकसित होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों के पहले चरण में 10 हजार किलोमीटर के दायरे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली लागू की जा रही है। इसके तहत लेन अनुशासन तोड़ने, बिना हेलमेट और बिना सीट बेल्ट वाहन चलाने जैसे मामलों में कैमरों से ई-चालान जारी किए जाएंगे। उन्होंने उद्योग जगत से निर्माण उपकरणों में डीजल के स्थान पर बिजली, हाइड्रोजन और जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की गति नौ किलोमीटर प्रतिदिन से बढ़कर 37 किलोमीटर प्रतिदिन हो गई है। बुनियादी ढांचे पर खर्च दो लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 16 लाख करोड़ रुपये और सड़क परिवहन मंत्रालय का बजटीय आवंटन बढ़कर 3.1 लाख करोड़ रुपये हो गया है। करीब चार लाख करोड़ रुपये की लागत से 7,500 किलोमीटर लंबे 25 ग्रीनफील्ड कॉरिडोर पर काम चल रहा है। धार्मिक पर्यटन से जुड़ी एक लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं और दो लाख करोड़ रुपये की सुरंग परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं।

सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सख्ती की बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले तीन-चार महीनों में उन्होंने 700 से 800 परियोजनाओं की समीक्षा की है। सख्त निगरानी के कारण पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष सड़कों की कमियों में 70 फीसदी की गिरावट आई है।

गडकरी ने कहा कि नागपुर-जबलपुर राजमार्ग पर बायो-बिटुमेन से एक किलोमीटर सड़क बनाई गई है। भारत हर वर्ष करीब 120 लाख टन बिटुमेन की खपत करता है, जिसमें से 50 से 60 फीसदी आयात करना पड़ता है। पराली और अन्य कचरे से बायो-बिटुमेन तथा टिकाऊ विमानन ईंधन तैयार करने से आयात पर निर्भरता घटाई जा सकती है। देश में बायो-सीएनजी की तीन हजार परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

उन्होंने कहा कि भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग का आकार उनके मंत्री बनने के समय 14 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने अगले पांच वर्षों में भारत को दुनिया का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल उद्योग बनाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने वाहन स्क्रैपिंग नीति, इलेक्ट्रिक वाहनों और नई बैटरी तकनीकों को भी उद्योग के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। देश में 360 रोपवे, केबल कार और फनिक्युलर रेलवे परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं।

------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर