योगी सरकार की डिजिटल पहल से वाराणसी के 84.67 फीसदी किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी
2.44 लाख से अधिक किसान जुड़े डिजिटल पहचान से, सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं का लाभ लेने में होगी आसानी
फार्मर आईडी से पीएम किसान सम्मान निधि, बीज-खाद सब्सिडी और बीमा योजनाओं तक पहुंच होगी सुगम, शेष किसानों को जोड़ने के लिए लगाए जा रहे कैंप
वाराणसी, 5 अक्टूबर। खेती-किसानी से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक आसानी से और समय पर पहुंचे, इसके लिए योगी सरकार किसानों की डिजिटल पहचान तैयार करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में वाराणसी में फार्मर रजिस्ट्री का काम तेजी से आगे बढ़ा है। जिले में निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 84.67 प्रतिशत किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। सरकार का प्रयास है कि जिले के सभी पात्र किसान फार्मर रजिस्ट्री से जुड़ें, ताकि उन्हें कृषि संबंधी योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने में किसी तरह की परेशानी न हो। उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल ने बताया कि वाराणसी में 2 लाख 89 हजार 190 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष सितंबर 2026 तक 2 लाख 44 हजार 854 किसान फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकृत हो चुके हैं। यह निर्धारित लक्ष्य का करीब 84.67 प्रतिशत है। शेष किसानों को भी डिजिटल पहचान से जोड़ने के लिए जिले में कैंप लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही ऑनलाइन और अन्य माध्यमों से भी पंजीकरण कराया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक अन्नदाताओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा सके।
फार्मर आईडी से योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया होगी आसान
फार्मर रजिस्ट्री के जरिए किसानों के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल के अनुसार, इसके माध्यम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, बीज सब्सिडी, खाद एवं उर्वरक सब्सिडी और बीमा योजनाओं सहित अन्य कृषि योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा होगी। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से पात्र किसानों को सरकारी सहायता सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। इससे भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ती है और बिचौलियों की भूमिका कम होती है।
भूमि और कृषि रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से जोड़ने में मिलेगी मदद
फार्मर रजिस्ट्री किसानों के भूमि और कृषि संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से जोड़ने में भी मदद करेगी। फसल खराब होने की स्थिति में फसल बीमा का लाभ लेने, कृषि ऋण प्राप्त करने तथा सूखा-बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान राहत और सहायता प्राप्त करने में पंजीकृत किसानों को सुविधा मिल सकती है।डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से किसान की पहचान और संबंधित विवरण की ट्रैकिंग भी आसान होगी। वाराणसी में फार्मर रजिस्ट्री के 84.67 प्रतिशत लक्ष्य तक पहुंचने के बाद अब शेष पात्र किसानों को इससे जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि डिजिटल व्यवस्था का लाभ अधिक से अधिक अन्नदाताओं तक पहुंच सके।