ईयू से द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा समझौता करके भारत तीसरा एशियाई देश बना
- भारत और ईयू देशों के बीच और ज्यादा सहयोग बढ़ने की उम्मीद
नई दिल्ली, 27 जनवरी (हि.स.)। यूरोपियन यूनियन (ईयू) और भारत ने कई द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा मुद्दों पर चर्चा के बाद मंगलवार को यहां साझेदारी पर सहमति जताई। भविष्य के लिए तैयार क्षमताएं बनाने के लिए सप्लाई चेन बनने के बाद भारत और ईयू देशों के बीच और ज्यादा सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। इस रक्षा समझौते के साथ ही भारत ईयू के साथ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी बनाने वाले जापान और साउथ कोरिया के साथ तीसरा एशियाई देश बन गया है।
गणतंत्र दिवस परेड की अतिथि के रूप में भारत आईं यूरोपियन यूनियन (ईयू) कमीशन की उपाध्यक्ष काजा कैलास के साथ आज रक्षा मंत्री ने नई दिल्ली में बैठक की। दोनों नेताओं ने बैठक के दौरान कई द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा मुद्दों पर चर्चा की। बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और ईयू लोकतंत्र, बहुलवाद और कानून के शासन के सिद्धांत को मानते हैं, जो लगातार गहरी होती साझेदारी का आधार हैं। उन्होंने कहा कि भारत इन्हीं मूल्यों को वैश्विक स्थिरता, सतत विकास और समावेशी समृद्धि के लिए व्यावहारिक सहयोग में बदलना चाहता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डिफेंस डील पर साइन होने को एक 'बड़ा कदम' बताया, जो दोनों ताकतों के बीच रिश्तों को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी तेजी से बदलते और मुश्किल होते ग्लोबल माहौल में आगे बढ़ने के लिए बनाई गई है। इससे इंडो-पैसिफिक रीजन में ईयू के लिए भारत की स्थिति मुख्य रणनीतिक स्तंभ के तौर पर और मजबूत होगी। रक्षा मंत्री ने कैलास के साथ मुलाकात के बाद कहा कि भारत और ईयू देशों के रक्षा उद्योगों को दुनिया की भलाई के लिए मिलकर काम करना चाहिए। कैलास ने कहा कि दोनों पक्षों को हिंद महासागर क्षेत्र में मिलकर काम करना चाहिए और संयुक्त एक्सरसाइज के जरिए एक-दूसरे की सर्वोत्तम प्रथाओं से सीखना चाहिए।
इस समझौते में आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों और उभरते डिफेंस डोमेन पर फोकस किया गया है, जिसमें खास तौर पर मैरीटाइम सिक्योरिटी: सुरक्षित और खुले समुद्री रास्ते पक्का करना, साइबर सिक्योरिटी: डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा करना और काउंटर-टेररिज्म: ग्लोबल आतंकी खतरों से निपटने के लिए मिलकर कोशिश करना शामिल है। यह समझौता इंडिया-ईयू के रिश्तों में एक बड़ा बदलाव दिखाता है। पारंपरिक खरीद-आधारित रिश्ते के बजाय ईयू अब भारत को तकनीक और डिफेंस सेक्टर में संभावित आपूर्तिकर्ता और सह-विकास भागीदार के तौर पर देखता है।
रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि यह भागीदारी लोकतंत्र, बहुलवाद, संघवाद और कानून के शासन के साझा मूल्य पर आधारित है। इसका मकसद वैश्विक सुरक्षा और समावेशी विकास के लिए इन आदर्शों के लिए व्यावहारिक सहयोग में बदलना है। यह समझौता 2025 तक ईयू देशों के साथ मजबूत हुए रिश्तों का नतीजा है, जिसमें संयुक्त समुद्री अभ्यास, हिंद महासागर, गिनी की खाड़ी, अदन की खाड़ी में सफल ऑपरेशन और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सोसाइटी ऑफ़ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स और ईयू लीडरशिप के बीच संबंध बढ़ना प्रमुख है।
रक्षा मंत्री ने गुरुग्राम में भारतीय नौसेना के इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन में एक लाइजन ऑफिसर तैनात करने के ईयू के प्रस्ताव का स्वागत किया। इस तैनाती से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैती का मुकाबला करने के लिए नौसेना के साथ परिचालन समन्वय को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि भारत का रक्षा उद्योग ईयू की पहल में अहम भूमिका निभा सकता है, खासकर जब ईयू देश तेजी से विविधता लाने और निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार/सुनीत निगम