अलनीनो से प्रभावित 12 राज्यों के 315 जिले, सबसे ज्यादा प्रभावित 112 जिलों में केन्द्र ने राज्यों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश
नई दिल्ली, 23 जून (हि.स.)। अल नीनो और कमजोर अनिश्चित मानसून से किसानों की चिंता को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने खरीफ सीज़न के लिए अपनी तैयारियों को तेज कर दी है। मंगलवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टर्स, आईसीएआर, आईसीएआर‑क्रीडा और आईएमडी के विशेषज्ञों के साथ आज उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक कर देशभर की स्थिति की समीक्षा की।
बैठक के बाद पत्रकार वार्ता में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस वर्ष मानसून सामान्य से काफी लेट चल रहा है और अब तक लगभग 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 2 जुलाई तक के सप्ताह में भी बारिश कमजोर रहने की संभावना है। इसका सीधा मतलब है कि खरीफ की फसलों पर प्रभाव पड़ सकता है– खासकर उन क्षेत्रों में, जहां खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है।
इसी संभावित जोखिम को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में केंद्र सरकार कई दिनों से पूर्व तैयारी में जुटी हैं।
शिवराज सिंह ने बताया कि कृषि मंत्रालय और आईसीएआर ने मिलकर वैज्ञानिक डेटा के आधार पर 315 जिलों का आकलन किया, जहां कम वर्षा और सिंचाई की कमी का खतरा ज़्यादा है। लगभग 315 जिलों में मानसून कमजोर रहने की संभावना का अनुमान है।
इनमें से 111 जिले उच्च प्राथमिकता वाले हैं, जहां सिंचाई का दायरा 25 प्रतिशत से कम है। 76 जिले मध्यम प्राथमिकता वाले हैं, जहां 25–50 प्रतिशत तक सिंचाई की व्यवस्था है। 128 जिले निम्न प्राथमिकता वाले हैं, जहां डैम और अन्य साधनों से अपेक्षाकृत बेहतर सिंचाई उपलब्ध है। इन जिलों का बड़ा हिस्सा 12 राज्यों में है जिसमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा शामिल है। इन राज्यों के कृषि मंत्रियों और जिला कलेक्टरों से बैठक में विस्तार से चर्चा की गई और उनसे स्थानीय स्तर पर तैयारी को तेज करने का आग्रह किया गया।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने बताया कि आईसीएआर और आईसीएआर‑क्रीडा ने सभी जिलों के लिए ज़िला कृषि आपातकालीन योजनाएं तैयार कर लिए हैं। इन योजनाओं में हर जिले की जलवायु, फसल पैटर्न, जल संसाधन और जोखिम को ध्यान में रखकर स्पष्ट उपाय दिए गए हैं, जैसे: कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलें कौन‑सी हों, फसल बदलाव की रणनीति क्या हो, उपलब्ध पानी का सबसे बेहतर उपयोग कैसे किया जाए, जोखिम कम करके आय के नए विकल्प कैसे बनाए जाएं। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपायों को तुरंत रिव्यू और अपडेट कर “ऑपरेशनल प्लान” की तरह बनाकर रखा जाए, ताकि जरूरत पड़ते ही बिना देरी के लागू किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि इस समय “पानी की एक‑एक बूंद हमारे लिए कीमती है और इसी सोच के साथ योजना बनाई जा रही है। तालाब, जलाशय, नाले, खेत‑तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, बोरी बंधन जैसी संरचनाओं को तुरंत दुरुस्त और मजबूत करने के लिेए राज्यों को निर्देश दिए गए है। मनरेगा और आगे चलने वाले ग्रामीण विकास कार्यक्रमों जैसे विकसित भारत जी राम जी में जल संरक्षण और जल संचयन के कामों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि रोजगार भी मिले और पानी की स्टोरेज क्षमता भी बढ़े।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि देश में 731 कृषि विज्ञान केन्द्र(केवीके) हैं, जो किसानों तक तकनीकी सलाह और बीज, फसल प्रबंधन की जानकारी पहुंचाने की मुख्य कड़ी हैं। केवीके और एग्रो‑मौसम सलाह इकाइयों को निर्देश दिया गया है कि वे जिलों के साथ मिलकर काम करें और अल नीनो के संभावित प्रभाव व कमजोर मानसून की स्थिति में किसानों को लगातार मार्गदर्शन दें। जानकारी पहुँचाने के लिए एग्रो‑मेट एडवाइजरी, एसएमएस और व्हाट्सऐप मैसेज, कॉल सेंटर, रेडियो और टीवी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल के निर्देश दिए गए है।
शिवराज सिंह ने कहा कि मानसून बहुत कमजोर रहा तो चारे का संकट पैदा होना संभव है। इसे देखते हुए जिन जिलों या राज्यों में चारे की पर्याप्त उपलब्धता है, वहां से कमी वाले क्षेत्रों के लिए अग्रिम सप्लाई योजना बनाई जा रही है। चारा स्टॉकिंग, वैकल्पिक चारा स्रोत और सप्लाई चेन पहले से प्लान की जा रही है, ताकि पशुपालकों को अचानक दिक्कत न हो। चारे की कालाबाज़ारी और जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर निगरानी तंत्र मजबूत करेंगी। शिवराज सिंह चौहान ने साफ कहा कि केवल फसल और पानी की तैयारी काफी नहीं, किसानों की वित्तीय सुरक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है। संभावित प्रभावित जिलों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का कवरेज बढ़ाने पर जोर है, ताकि फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को समय पर मुआवज़ा मिल सके। जिन किसानों के पास अभी किसान क्रेडिट कार्ड नहीं है, उनके कार्ड बनाने का काम तेज़ करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उनके पास बीज खराब होने, पुनर्बुवाई या अन्य निवेश के समय पर्याप्त संसाधन हों।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि हर सप्ताह सचिव स्तर पर समीक्षा हो रही है और वे स्वयं भी मंगलवार को अल नीनो से जुड़ी परिस्थितियों की समीक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को घबराने की नहीं, तैयारी और सामूहिक कार्रवाई की ज़रूरत है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी