अमेरिकी नागरिकों से 261 करोड़ रुपये की ठगी में फर्जी कॉल सेंटर सिंडिकेट के चार और आरोपित गिरफ्तार
नई दिल्ली, 04 नवंबर (हि.स.)। अमेरिकी नागरिकों को फर्जी कॉल सेंटर के जरिए ठगने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चार और प्रमुख आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जांच में जुलाई 2025 से इस साल सितंबर के बीच 927 लेन-देन के जरिए करीब 2.73 करोड़ अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 261 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। ईडी के हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने हर्षिल नयनभाई रावल, जसवंत सिंह, चेतन मुंजाल और प्रणव पिठाडिया को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया है। नामपल्ली स्थित विशेष पीएमएलए अदालत ने चारों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
ईडी के अनुसार, इस मामले में इससे पहले विकास निमर को 27 जुलाई, ताराचंद निमर को 5 अगस्त और मोहम्मद इरफान अंसारी को 10 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। ये तीनों चंचलगुड़ा स्थित केंद्रीय जेल में बंद हैं। चार नई गिरफ्तारियों के साथ इस मामले में गिरफ्तार आरोपितों की संख्या सात हो गई है।
इससे पहले ईडी ने 15 सितंबर को पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ में चार ठिकानों पर तलाशी ली थी। इस दौरान पटियाला में दो और पुणे में एक सक्रिय कॉल सेंटर का पता चला था। तलाशी के समय इन केंद्रों पर करीब 220 लोग काम करते पाए गए थे। एजेंसी ने 65 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप और कंप्यूटर तथा डेटा स्टोरेज डिस्क सहित कुल 79 डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच की है। इनसे गिरोह की बातचीत, खातों का ब्योरा, कॉलिंग डेटा, पीड़ितों की जानकारी और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट से जुड़े रिकॉर्ड मिले हैं।
ईडी ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े मूल मामलों के आधार पर धनशोधन की जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि गिरोह भारत से संगठित तरीके से फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर रहा था। इनमें कर्मचारियों को डायलर, बैंकर और क्लोजर की भूमिका में रखा गया था। ये लोग अमेरिकी नागरिकों को फोन कर उनके बैंक खातों में संदिग्ध खरीदारी या अवैध लेन-देन होने का डर दिखाते थे। इसके बाद खुद को अमेरिकी ड्रग प्रवर्तन प्रशासन (डीईए), न्याय विभाग (डीओजे), संघीय व्यापार आयोग (एफटीसी) और अमेरिकी वित्त विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ितों को कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी की धमकी दी जाती थी।
आरोपितों ने पीड़ितों से ठगी के लिए कई तरीके अपनाए। उन्हें सोने की छड़ें और नकदी कूरियर तथा पिक-अप टीमों के माध्यम से सौंपने के लिए मजबूर किया जाता था। इसके अलावा म्यूल बैंक खातों में वायर ट्रांसफर, गिफ्ट कार्ड और बिटकॉइन एटीएम के जरिए भी रकम जमा कराई जाती थी। ईडी के मुताबिक, इस गिरोह ने मुख्य रूप से 1940 के दशक में जन्मे बुजुर्ग अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया था। ठगी के लिए जर्मनी और फिनलैंड में स्थित ऑटो-डायलर सर्वरों के जरिए करीब 20 लाख अमेरिकी नागरिकों के डेटा का इस्तेमाल किया गया।
जांच एजेंसी को गिरोह के व्हाट्सएप समूहों और डिजिटल उपकरणों से मिले रिकॉर्ड के अनुसार, जुलाई 2025 से सितंबर 2026 के बीच 927 स्वीकृत लेन-देन के जरिए करीब 2.73 करोड़ अमेरिकी डॉलर की रकम ठगी गई। गिरोह ने धन के लेन-देन और शोधन के लिए वेल्स फार्गो तथा बैंक ऑफ अमेरिका सहित 15 से अधिक प्रमुख अमेरिकी बैंकों में 397 बैंक खाते खोल रखे थे।
ईडी ने गिरफ्तार आरोपितों की भूमिका का भी ब्योरा दिया है। एजेंसी के अनुसार, प्रणव पिठाडिया पटियाला स्थित कॉल सेंटर का संचालक और प्रबंधक था। उसके अधीन 110 डायलर और 242 कर्मचारी काम करते थे। हर्षिल नयनभाई रावल कॉल सेंटरों के मुख्य खातों, मुनाफे, साझेदारों की हिस्सेदारी और दुबई रकम भेजने का प्रबंधन करता था। आरोप है कि वह अपराध से अर्जित रकम को संपत्तियों में निवेश कर रहा था।
जसवंत सिंह अमेरिका में पीड़ितों से नकदी और सोना लेने वाली टीमों के साथ समन्वय करता था। इसके बाद हवाला के जरिए रकम को भारत में रुपये में बदला जाता था। वहीं, चेतन मुंजाल मैसर्स रब्दिता कॉर्पोरेट्स में 25 फीसदी का साझेदार है। यह कंपनी काला घोड़ा रेस्तरां का संचालन करती है। ईडी के अनुसार, वह कॉल सेंटरों को संरक्षण देता था और अपराध से अर्जित रकम प्राप्त करता था।
जांच में यह भी सामने आया कि ठगी से प्राप्त अमेरिकी डॉलर को पहले दुबई और हांगकांग स्थित कथित फर्जी कंपनियों के माध्यम से भेजा जाता था। इसके अलावा टीआरसी-20 आधारित यूएसडीटी और बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर रकम का लेन-देन किया जाता था। बाद में हवाला और आंगड़िया नेटवर्क के जरिए इसे भारतीय रुपये में बदलकर देश में लाया जाता था। ईडी के अनुसार, इस रकम का निवेश अचल संपत्तियों, सोने, महंगी गाड़ियों और रेस्तरां कारोबार में किया जा रहा था।
ईडी ने कहा कि मामले में अपराध से अर्जित शेष रकम का पता लगाने, धन के लेन-देन की पूरी कड़ी खंगालने और गिरोह से जुड़ी अन्य कंपनियों तथा व्यक्तियों की भूमिका निर्धारित करने के लिए जांच जारी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर