डूसू चुनाव में जीत के बाद सत्य निकेतन पहुंचे नवनिर्वाचित पदाधिकारी, छात्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष का लिया संकल्प
नई दिल्ली, 21 सितंबर (हि.स.)। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में जीत दर्ज करने के तुरंत बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के नेतृत्व में नवनिर्वाचित डूसू पदाधिकारियों ने सत्य निकेतन स्थित 'सत्य स्क्वायर' का दौरा किया और वहां श्रद्धांजलि अर्पित की।
अभाविप के अनुसार इस दौरान छात्रसंघ नेतृत्व ने संकल्प लिया कि नया छात्रसंघ पूरे शैक्षणिक सत्र में सत्य निकेतन और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान तथा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करेगा, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अभाविप दिल्ली के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि यह जीत दिल्ली विश्वविद्यालय के आम छात्रों के विश्वास और अभाविप के सतत संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा, छात्रसंघ चुनाव केवल पदों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के प्रति हमारी जवाबदेही की शुरुआत है। सत्य निकेतन साउथ कैंपस के छात्रों की धड़कन है, लेकिन यहां छात्र लगातार आवास और बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं से जूझते हैं। अभाविप का प्रत्येक कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करेगा कि दिल्ली में पढ़ने वाले किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो। हम प्रशासन से लेकर सरकार तक हर मंच पर छात्रों की आवाज मजबूती से उठाएंगे।
नवनिर्वाचित डूसू अध्यक्ष यश डबास ने कहा कि सत्य स्क्वायर पर आकर उन्होंने केवल औपचारिक दौरा नहीं किया, बल्कि छात्रों के समक्ष उनके हर सुख-दुख में साथ खड़े रहने की प्रतिज्ञा ली है। उन्होंने कहा कि सत्य निकेतन में रहने वाले छात्रों से मनमाना किराया वसूलना और उन्हें बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखना एक गंभीर मुद्दा है। डूसू इस पूरे वर्ष सक्रिय रहकर 'रूम रेंट रेगुलेशन एक्ट' के प्रभावी क्रियान्वयन, सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और छात्रों के कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएगा। हमारा लक्ष्य कैंपस से लेकर हॉस्टल और निजी आवासों तक प्रत्येक छात्र को भयमुक्त व न्यायपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना है।
साउथ कैंपस के हजारों छात्र-छात्राओं के लिए सत्य निकेतन एक प्रमुख आवासीय और अध्ययन केंद्र है। यहां रहने वाले विद्यार्थियों को अक्सर अत्यधिक पीजी व कमरा किराया, बुनियादी सुविधाओं के अभाव और सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। डूसू नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि छात्रों का किसी भी स्तर पर शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी