समुद्र के रास्ते दुबई पहुंचा उप्र का दशहरी, लंगड़ा आम

 


नई दिल्ली, 22 जुलाई (हि.स.)। भारत के ताजा आम निर्यात क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल हुई है। उत्तर प्रदेश के अमरोहा से 12.5 टन प्रीमियम दशहरी और लंगड़ा आम पहली बार 25 दिनों की लंबी समुद्री यात्रा के बाद सफलतापूर्वक दुबई पहुंचाए गए। यह निर्यात आईसीएआर-केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ और एपीडा द्वारा संयुक्त रूप से विकसित समुद्री निर्यात प्रोटोकॉल के तहत किया गया।

आम की खेप का निर्यात अमरोहा की शहनाज एक्सपोर्ट ने अताशी ग्लोबल के सहयोग से यूएई की प्रमुख रिटेल चेन लुलु ग्रुप को किया। पूरे अभियान में आईसीएआर-सीआईएसएच ने तकनीकी मार्गदर्शन और एपीडा ने आवश्यक सहयोग प्रदान किया।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में बताया कि 22 जून 2026 को तोड़े गए आमों की वैज्ञानिक तरीके से ग्रेडिंग और पैकिंग की गई। उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए आईसीएआर-सीआईएसएच द्वारा विकसित ‘मेटवॉश’ तकनीक का उपयोग किया गया। इसके बाद आमों को 40 फुट के रेफ्रिजरेटेड कंटेनर में लगातार कोल्ड चेन के साथ समुद्री मार्ग से दुबई भेजा गया।

पश्चिमी विक्षोभ के कारण परिवहन में देरी होने से खेप 17 जुलाई को यानी 25 दिन बाद दुबई पहुंची। इसके बावजूद लगभग 90 प्रतिशत आम अच्छी और बिक्री योग्य स्थिति में पाए गए, जिससे इस तकनीक की सफलता साबित हुई।

इस उपलब्धि से समुद्री मार्ग से आम निर्यात का नया रास्ता खुला है। हवाई माल ढुलाई की तुलना में समुद्री परिवहन काफी सस्ता होने से निर्यातक किसानों को खरीद के समय प्रति किलोग्राम लगभग 15 से 20 रुपये अधिक कीमत दे सके। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ भारतीय आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इस सफलता के बाद उत्तर प्रदेश सहित अन्य आम उत्पादक राज्यों से भी समुद्री मार्ग से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, जिससे खाड़ी देशों और अन्य वैश्विक बाजारों में भारतीय आम की पहुंच बढ़ेगी और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी