उज्बेकिस्तान के समरकंद विश्वविद्यालय में भी स्थापित हुआ ‘इंडियन कार्बन गार्डन’

 


नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (हि.स.)। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए उज्बेकिस्तान के समरकंद शहर स्थित समरकंद स्टेट यूनिवर्सिटी में भी ‘इंडियन कार्बन गार्डन’ की स्थापना की गई। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. दीनबंधु साहू द्वारा डिजाइन और विकसित इस कार्बन गार्डन का उद्घाटन दिल्ली विश्वविद्यालय की रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल के अध्यक्ष एवं भारत के पहले कार्बन गार्डन के संस्थापक प्रो. दीनबंधु साहू ने किया।

इस अवसर पर समरकंद स्टेट यूनिवर्सिटी के रेक्टर एवं उज्बेकिस्तान के सीनेटर प्रो. रुस्तम खालमुरादोव सहित विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ शिक्षाविद मौजूद रहे। इनमें प्रो-वाइस चांसलर, निदेशक और विभिन्न विभागों के प्रमुख शामिल थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. रुस्तम खालमुरादोव ने कहा कि कार्बन गार्डन की स्थापना केवल उज्बेकिस्तान ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य एशियाई क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। ऐसे में कार्बन गार्डन जैसी पहल पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने कहा कि यह भारत और उज्बेकिस्तान के बीच वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। दोनों देशों के बीच शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देकर इस साझेदारी को और व्यापक बनाया जा सकता है। उन्होंने क्षेत्र में मजबूत जर्मप्लाज्म यानी आनुवांशिक सामग्री के संरक्षण तथा महत्वपूर्ण फसलों के भंडार विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. दीनबंधु साहू ने कहा कि विभिन्न देशों, विशेषकर मध्य एशियाई देशों में, अधिक से अधिक कार्बन गार्डन स्थापित किए जाने चाहिए। इससे लोगों को इनके पर्यावरणीय महत्व के बारे में जागरूक करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि कार्बन गार्डन केवल कार्बन संरक्षण से जुड़ी पहल नहीं है, बल्कि इन्हें ‘इकोसिस्टम सर्विस मॉडल’ और छोटे जैव विविधता पार्क के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। ये पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के महत्व और पारिस्थितिकी तंत्र की उपयोगिता को समझने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

प्रो. साहू ने कहा कि भारत के कई कॉलेजों में पहले से ही कार्बन गार्डन स्थापित किए जा चुके हैं। आने वाले समय में देश के अन्य शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस पहल का विस्तार करने की संभावनाएं हैं।

समरकंद विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो-वाइस चांसलर प्रो. मुहतोर नसीरोव ने इस पहल को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने हाल ही में भारत आने वाले एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा कि मध्य एशिया के अन्य हिस्सों में भी ऐसे कार्बन गार्डन स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी