सूखाग्रस्त क्षेत्रों की कृषि के लिए ‘डेल्ही डिक्लेरेशन’ जारी, वैश्विक दक्षिण के देशों में साझा सहयोग पर बनी सहमति

 

नई दिल्ली, 13 सितंबर (हि.स.)। सूखाग्रस्त और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में खेती को टिकाऊ बनाने के लिए विज्ञान, उन्नत नवाचार और मजबूत आंकड़ा प्रणाली के साझा एजेंडे पर आधारित ‘डेल्ही डिक्लेरेशन ऑन ड्रायलैंड्स’ को सर्वसम्मति से अपना लिया गया है। सम्मेलन के दौरान कृषि को मजबूत बनाने के लिए वैश्विक फसल विविधता न्यास (ग्लोबल क्रॉप डायवर्सिटी ट्रस्ट) और विप्रो सहित कई संस्थानों के बीच अहम समझौते हुए। साथ ही 34 देशों के 170 नामांकनों में से चयनित संस्थानों व वैज्ञानिकों को 'आईएसएससीए ग्लोबल अवॉर्ड्स 2026' और 16 शोधार्थियों को सर्वश्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार से नवाजा गया।

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने बताया कि यहां 'दक्षिण-दक्षिण सहयोग के साथ ड्रायलैंड कृषि में बदलाव' विषय पर आयोजित तीन दिवसीय 'ड्रायलैंड कांग्रेस 2026' का रविवार को औपचारिक समापन हो गया। ड्रायलैंड कांग्रेस मूल रूप से पानी की कमी और सूखे की मार झेलने वाले कृषि क्षेत्रों के लिए एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय मंच है, जहां दुनिया भर के वैज्ञानिक, नीति निर्माता और संस्थान एक साथ बैठकर कम पानी में बेहतर पैदावार, जलवायु परिवर्तन से निपटने की तकनीक और किसानों की आजीविका सुरक्षित करने के ठोस उपायों पर मंथन करते हैं।

समापन सत्र में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों की कृषि नीति में भविष्य की जरूरतों का समावेश होना चाहिए। इसके लिए एक मजबूत संस्थागत व्यवस्था की जरूरत है और आईसीएआर के राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र एवं नीति अनुसंधान संस्थान को इस क्षेत्र में भविष्य की कृषि संबंधी कार्ययोजना तैयार करने का दायित्व दिया जाएगा। उन्होंने शोध, कृषि व्यवहार और नीतियों को जोड़ने वाली प्रयोगशालाएं विकसित करने पर भी बल दिया।

अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रिसैट) के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि सूखाग्रस्त क्षेत्र वैश्विक खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सम्मेलन के विचार-विमर्श को जमीन पर उतारने का आह्वान करते हुए कहा कि अवधारणाओं को वास्तविक क्रियान्वयन में बदलने के लिए विशेषज्ञता, वैज्ञानिक ज्ञान और आपसी साझेदारी को एक मंच पर लाना अनिवार्य है।

सम्मेलन के दौरान इक्रिसैट ने एवियर लाइफ साइंसेज, राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम), विप्रो लिमिटेड और ओडिशा के अंगुल व रायगड़ा जिला प्रशासन के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। कांग्रेस के सह-अध्यक्ष डॉ. डी.के. यादव और डॉ. स्टैनफोर्ड ब्लेड ने तीन दिवसीय सत्र की प्रमुख सिफारिशों को पटल पर रखा।

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के दक्षिण-दक्षिण सहयोग दिवस के अवसर पर विशेष सत्र आयोजित हुआ, जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव, खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के महानिदेशक और यूएनओएसएससी की निदेशक दिमा अल-खातिब के संदेश पढ़े गए। सत्र में इथियोपिया, सेनेगल, ब्राजील, चीन और भारत के प्रतिनिधियों ने सफल कृषि मॉडलों के विस्तार पर अपने अनुभव साझा किए। वैश्विक पुरस्कारों की परिवर्तनकारी उत्कृष्टता श्रेणी में लेबनान के आईसीएआरडीए, मेक्सिको के सीआईएमएमवाईटी और ओडिशा सरकार के 'ओडिशा आजीविका मिशन' को सम्मानित किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर