कृषि भूमि का गैर-कृषि भूमि में रूपांतरण खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चिंताः मेधा कुलकर्णी

 


नई दिल्ली, 30 मार्च (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद डॉ. मेधा कुलकर्णी ने सोमवार को राज्यसभा में कृषि भूमि का गैर-कृषि भूमि में रूपांतरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान देश में खेती योग्य भूमि का घटता प्रतिशत चिंताजनक है। 140 करोड़ नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करनी है तो कृषि भूमि का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

डॉ. कुलकर्णी ने शून्यकाल के दौरान कहा, देश के कई जिलों और शहरों में कृषि भूमि की प्लॉटिंग कर आवासीय परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे बोने योग्य क्षेत्र में लगातार कमी आ रही है। पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में एक लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को गैर-कृषि घोषित किया गया है। वर्तमान में भारत में केवल लगभग 45 प्रतिशत भूमि ही खेती के अंतर्गत है, जिसमें करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यदि यह स्थिति जारी रही तो खाद्य सुरक्षा, किसानों की आजीविका, जीएसटी राजस्व और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने बताया कि एक अध्ययन के अनुसार जनसंख्या में एक प्रतिशत वृद्धि होने पर कृषि क्षेत्र में 0.45 प्रतिशत की कमी आती है।

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी कृषि भूमि को संरक्षित रखें और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करें। आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, सूक्ष्म सिंचाई और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर उत्पादन बढ़ाया जाए। कृषि भूमि का गैर-कृषि उपयोग केवल व्यापक जनहित से जुड़े बुनियादी परियोजनाओं तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। उपजाऊ भूमि के संरक्षण के लिए कठोर कानून लागू किए जाएं तथा भूमि उपयोग में हो रहे बदलावों पर सैटेलाइट और डिजिटल तकनीक के माध्यम से निगरानी रखी जाए, ऐसी मांग उन्होंने केंद्र सरकार से की।

उन्होंने कहा कि कृषि भूमि का उपयोग केवल खेती के लिए ही किया जाना चाहिए। यदि किसी कारणवश किसानों को अपनी भूमि बेचनी पड़े, तो सरकार उचित मुआवजा देकर उसे खरीदकर पुनः कृषि कार्य के लिए ही उपयोग सुनिश्चित करे। कृषि क्षेत्र भविष्य का एक महत्वपूर्ण उद्योग बनने जा रहा है, इसलिए उसका संरक्षण और संवर्धन समय की आवश्यकता है, ऐसा उन्होंने रेखांकित किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी