गांधीनगर में 17 सितंबर को होगी गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के संवर्धन पर राष्ट्रीय कार्यशाला
- केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल करेंगे शिरकत-गांधीनगर में जुटेंगे मछुआरे, अधिकारी और क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ
नई दिल्ली, 16 सितंबर (हि.स.)। भारत सरकार का मत्स्य पालन विभाग गुरुवार को गुजरात के गांधीनगर में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने (डीप-सी फिशिंग) को बढ़ावा देने और ‘एक्सेस पास’ तथा एलओए धारकों के साथ संवाद के लिए एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित करेगा। कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक और स्थानीय मछुआरों को उच्च मूल्य वाले समुद्री संसाधनों के दोहन के लिए प्रोत्साहित करने के साथ जमीनी स्तर की चुनौतियों को समझना और क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए हितधारकों के सुझाव जुटाना है।
कार्यशाला में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह), गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और केंद्रीय मत्स्य पालन राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल शामिल होंगे। इसमें महिला मछुआरों समेत देशभर के मछुआरे, केंद्र और तटीय राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी तथा आईसीएआर, सिफनेट, नाबार्ड, एनसीईएल, एनसीडीसी, सीआई और एमपीईडीए समेत विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि भाग लेंगे।
मंत्रालय के अनुसार, कार्यशाला में गहरे समुद्र में मत्स्य पालन की पूरी मूल्य शृंखला से जुड़े विषयों पर तकनीकी सत्र होंगे। इनमें समुद्री संसाधनों की क्षमता, आधुनिक नौकाओं का इस्तेमाल, कौशल विकास, संस्थागत वित्तपोषण, प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन तथा निर्यात बाजारों तक पहुंच जैसे विषय शामिल हैं। विशेषज्ञ भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और गहरे समुद्र में आधुनिक तकनीक अपनाने, मछुआरों के क्षमता निर्माण तथा सहकारी मॉडल के माध्यम से निवेश को बढ़ावा देने पर भी विचार-विमर्श करेंगे।
वर्तमान में देश की अधिकांश मछली पकड़ने की गतिविधियां तट से 40-50 समुद्री मील के दायरे में केंद्रित हैं, जबकि गहरे समुद्री क्षेत्र में टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के दोहन की व्यापक संभावनाएं हैं। भारत के पास करीब 11,099 किलोमीटर लंबी तटरेखा और लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर का विशेष आर्थिक क्षेत्र है। इस क्षेत्र में करीब 58.6 लाख मीट्रिक टन समुद्री मत्स्य संसाधन की क्षमता आंकी गई है और यह लगभग 50 लाख मछुआरों की आजीविका का आधार है।
केंद्र सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 73,890 करोड़ रुपये मूल्य के समुद्री उत्पादों का निर्यात किया। गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के विस्तार को इसी व्यापक समुद्री अर्थव्यवस्था और मछुआरों की आय बढ़ाने की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) नियम-2025’ और ‘हाई सीज दिशानिर्देश-2025’ अधिसूचित किए हैं। इनके तहत तट से 12 से 200 समुद्री मील के बीच मछली पकड़ने के लिए ‘रियलक्राफ्ट’ पोर्टल के माध्यम से नि:शुल्क डिजिटल ‘एक्सेस पास’ जारी किया जाता है। मंत्रालय के अनुसार, तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त आवेदनों के आधार पर अब तक कुल 9,650 एक्सेस पास जारी किए जा चुके हैं।
24 मीटर से अधिक लंबाई वाली यंत्रीकृत नौकाओं के लिए यह पास अनिवार्य है, जबकि छोटे और गैर-यंत्रीकृत पारंपरिक जहाजों को स्थानीय आजीविका की सुरक्षा के उद्देश्य से इससे पूरी तरह छूट दी गई है।------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर