मेट्टूर बांध से नहीं छोड़ा गया पानी, कावेरी डेल्टा के 16 लाख एकड़ कृषि क्षेत्र पर संकट, किसान निराश

 


सेलम, 12 जून (हि.स.)। तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र के लाखों किसानों को शुक्रवार को उस समय निराशा का सामना करना पड़ा, जब निर्धारित तिथि 12 जून को मेट्टूर बांध से कुरुवई (प्रारंभिक धान) फसल की सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा गया। बांध में जलस्तर और जल भंडारण अपेक्षित स्तर से कम होने के कारण इस वर्ष भी सिंचाई सत्र की शुरुआत समय पर नहीं हो सकी।

मेट्टूर बांध कावेरी डेल्टा के 12 जिलों की लगभग 16.05 लाख एकड़ कृषि भूमि के लिए जीवनरेखा माना जाता है। परंपरा के अनुसार हर वर्ष 12 जून से 28 जनवरी तक डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई के लिए बांध से पानी छोड़ा जाता है। इसके लिए बांध का जलस्तर कम से कम 90 फीट और जल प्रवाह पर्याप्त होना आवश्यक माना जाता है, ताकि कुरुवई धान की खेती समय पर शुरू हो सके।

हालांकि इस वर्ष 12 जून को मेट्टूर बांध का जलस्तर केवल 79.62 फीट दर्ज किया गया, जबकि जल प्रवाह महज 424 क्यूसेक रहा। जल भंडारण और आवक दोनों ही अपेक्षा से कम होने के कारण सिंचाई के लिए पानी छोड़ना संभव नहीं हो पाया।

इस स्थिति ने कावेरी डेल्टा के किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। समय पर पानी नहीं मिलने से कुरुवई फसल की बुवाई प्रभावित हो सकती है, जिससे उत्पादन में कमी आने की आशंका है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं हुआ तो इसका असर केवल किसानों पर ही नहीं, बल्कि खेती से जुड़े हजारों कृषि मजदूरों के रोजगार पर भी पड़ेगा।

आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने के बाद केरल और कर्नाटक के कावेरी जलग्रहण क्षेत्रों में अच्छी बारिश होती है। इसके परिणामस्वरूप कर्नाटक का कबिनी बांध भरता है और अतिरिक्त पानी कावेरी नदी के जरिए मेट्टूर बांध तक पहुंचता है। लेकिन इस वर्ष कावेरी बेसिन में अपेक्षित वर्षा नहीं होने से जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं जुट पाया है।

कर्नाटक के 65 फीट ऊंचे कबिनी बांध का वर्तमान जलस्तर 31.84 फीट दर्ज किया गया है। बांध में पानी की आवक 2,446 क्यूसेक है, जबकि कुल जल भंडारण 6.08 टीएमसी है। ऐसे में निकट भविष्य में मेट्टूर बांध को पर्याप्त जल मिलने की संभावना भी कम दिखाई दे रही है।

पिछले वर्षों के आंकड़े स्थिति की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। वर्ष 2023 में मेट्टूर बांध का जलस्तर 103.35 फीट होने के कारण 12 जून को ही कुरुवई खेती के लिए पानी छोड़ दिया गया था। हालांकि बाद में कमजोर मानसून के चलते जलस्तर तेजी से घट गया और 10 अक्टूबर को सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति रोकनी पड़ी थी।

लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों के अनुसार, मेट्टूर बांध के इतिहास में यह 61वीं बार है जब निर्धारित तिथि पर कुरुवई फसल के लिए पानी नहीं छोड़ा जा सका। आंकड़ों के मुताबिक, बांध के इतिहास में केवल 20 वर्षों में ही 12 जून को समय पर पानी छोड़ा गया है, जबकि 11 अवसरों पर पर्याप्त जल उपलब्ध होने के कारण तय तिथि से पहले ही पानी जारी कर दिया गया था।

वर्ष 2024 में भी कम जलस्तर के कारण डेल्टा क्षेत्र के लिए 28 जुलाई को पानी छोड़ा गया था। उस समय तमिलनाडु सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए 78.67 करोड़ रुपये के विशेष कुरुवई पैकेज की घोषणा की थी।

इस वर्ष संभावित संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने 134.83 करोड़ रुपये के विशेष कुरुवई सहायता पैकेज की घोषणा की है। इसके तहत किसानों को वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था, कृषि सहायता और अन्य राहत उपाय उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।

फिलहाल कावेरी डेल्टा के किसानों की निगाहें मानसून की प्रगति और कर्नाटक के जलाशयों में बढ़ते जलस्तर पर टिकी हैं। मौसम अनुकूल रहने और जलग्रहण क्षेत्रों में अच्छी वर्षा होने पर ही मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्र की खेती को राहत मिल सकेगी।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV