केंद्र ने बीएफएसआई क्षेत्र के लिए डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट जारी की, एआई असमानता और नए साइबर जोखिमों पर दी गई चेतावनी

 


नई दिल्ली, 13 जुलाई (हि.स.)। केंद्र सरकार ने बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र तथा डिजिटल भुगतान तंत्र के लिए डिजिटल थ्रेट (खतरा) रिपोर्ट 2025-26 का दूसरा संस्करण जारी किया। रिपोर्ट में एआई असमानता और तेजी से बदलते साइबर खतरों को प्रमुख जोखिम बताया गया है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सीईआरटी-इन), वित्त क्षेत्र की कंप्यूटर सिक्योरिटी इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सीएसआईआरटी-फिन) और साइबर सुरक्षा कंपनी सिसा (सिसा) के सहयोग से यह रिपोर्ट तैयार की है।

मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा कि जैसे-जैसे साइबर खतरे जटिल होते जा रहे हैं, सार्वजनिक संस्थानों और उद्योग के बीच भरोसेमंद साझेदारी डिजिटल विश्वास को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमें हर पहलू पर गंभीरता से तैयारी करनी होगी और सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। जहां यह साइबर अपराध का मामला है, वहां प्रभावित व्यक्तियों की मदद करने की प्राथमिक जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है। वहीं जब यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा होता है और सरकार के अपने ढांचे की रक्षा करनी होती है, तो कई एजेंसियां इसमें शामिल होती हैं। इसके लिए समन्वित प्रयास जरूरी है।

रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले वर्ष की सात भविष्यवाणियों में से छह पहले ही पूरी तरह साकार हो चुकी हैं। इससे पता चलता है कि किसी खतरे के उभरने और उसके इस्तेमाल के बीच का समय अब महीनों या हफ्तों तक सिमट गया है। सोशल इंजीनियरिंग, क्रेडेंशियल चोरी, सप्लाई चेन समझौता और क्लाउड एक्सप्लॉइटेशन जैसे तरीके अब आम हमले बन चुके हैं।

वैश्विक साइबर सुरक्षा कंपनी सिसा के संस्थापक और सीईओ दर्शन संतमूर्ति ने कहा कि बीएफएसआई उद्योग भरोसे पर आधारित है और जब यह भरोसा कमजोर होता है तो असर केवल एक संस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ग्राहकों, साझेदारों और पूरी अर्थव्यवस्था तक फैलता है।

सीईआरटी-इन के महानिदेशक डॉ. संजय बहल ने कहा कि भारत का वित्तीय तंत्र अधिक जुड़ा हुआ और तकनीक-आधारित हो रहा है, ऐसे में साइबर रेजिलिएंस को साझा जिम्मेदारी मानना होगा। रिपोर्ट संस्थानों को लगातार जोखिम आकलन और समन्वित प्रतिक्रिया की दिशा में मार्गदर्शन देती है।

इस संस्करण की विशेषता साइबर विफलता की संरचना (एनाटॉमी ऑफ साइबर फेल्योर) फ्रेमवर्क है, जो दिखाता है कि आधुनिक साइबर हमले एकल चूक नहीं बल्कि कई कमजोरियों की शृंखला से होते हैं। रिपोर्ट ने बीएफएसआई क्षेत्र के लिए 18 माह का रोडमैप प्रस्तुत किया है, जिसमें बुनियादी नियंत्रणों को मजबूत करने से लेकर सतत क्षमताओं और अधिक लचीली सुरक्षा संरचनाओं के निर्माण तक के कदम शामिल हैं।

--------------

हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर