सर्वसम्मति से पारित हुआ दिल्ली का 'हरित' बजट
नई दिल्ली, 27 मार्च (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा के बजट सत्र में शुक्रवार को वर्ष 2026-27 का 'हरित' बजट (1,03,700 करोड़) सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूर्व सरकार की आर्थिक नाकामियों का कच्चा चिट्ठा खोला। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार दिल्ली पर करोड़ों रुपये का कर्ज छोड़ गई है, जिसे मौजूदा सरकार अपने प्रयासों से संभाल रही है। उन्होंने सरकार की प्राथमिकताएं बताते हुए कहा कि अब दिल्ली में बहानों की नहीं, परिणामों की राजनीति होगी। यह नई सरकार और नई सोच का दौर है, जहां काम पर जोर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि अब अधूरे काम पूरे किए जाएंगे, हर रुपये का सही हिसाब रखा जाएगा और हर नागरिक को उसका हक मिलेगा। उन्होंने कहा कि अब टकराव की जगह बदलाव पर ध्यान होगा और राजनीति की बजाय परफॉर्मेंस को प्राथमिकता दी जाएगी। दिल्ली अब रुकने वाली नहीं है, बल्कि तेजी से आगे बढ़ेगी और देश के लिए एक उदाहरण बनेगी।
मुख्यमंत्री ने बजट पर चर्चा के दौरान कहा कि यह अब तक का सबसे बड़ा कैपिटल एक्सपेंडिचर वाला बजट है, जो केवल मुफ्त योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली में वास्तविक विकास सुनिश्चित करने का संकल्प है। सरकार ने पिछले वर्ष भी पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दी थी और इस वर्ष उसे और बढ़ाकर गवर्नेंस में ठोस बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उन्हें सदन में अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया, लेकिन उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान नहीं किया और सड़क पर बैठना उचित समझा। जब किसी को सदन की मर्यादा का अनुभव ही नहीं होता तो उस पर कुछ कहना व्यर्थ है। विपक्ष के पास जब ठोस मुद्दे नहीं थे तो उन्होंने असंगत और भ्रामक मुद्दे उठाए, यहां तक कि ऐसे लोग भी बोले जिनका सदन में कोई अधिकार नहीं था।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लोन को लेकर अनावश्यक भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि 1999 से ही सरकारें ऋण लेती रही हैं। उस समय भी हजारों करोड़ रुपये के लोन लिए गए थे और पूर्व सरकार के कार्यकाल में भी हर वर्ष ऋण लिया गया, वह भी अधिक ब्याज दरों पर। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत वर्तमान सरकार ने वित्तीय अनुशासन का पालन करते हुए जीएसडीपी के निर्धारित 3 फीसद की सीमा के मुकाबले केवल 1.17 फीसद ऋण लिया है, वह भी देश में सबसे कम 7.4 फीसद ब्याज दर पर।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार अपने पीछे 47,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज छोड़कर गई, जिसमें 27,547 करोड़ रुपये अब भी बकाया है। साथ ही कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अधूरी छोड़ी गईं और उनकी वित्तीय देनदारियां वर्तमान सरकार को वहन करनी पड़ीं। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में 3,700 करोड़ रुपये, मेट्रो परियोजना में 9,087 करोड़ रुपये, अस्पताल निर्माण में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक और डीएमआरसी-पीडब्ल्यूडी इंटीग्रेटेड परियोजनाओं में 1,031 करोड़ रुपये की देनदारी थी। कई स्कूल और अस्पताल वर्षों से अधूरे पड़े थे, जिनकी लागत लगातार बढ़ती गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने पिछली सरकार की कई लंबित देनदारियों का भुगतान किया है, जिनमें खिलाड़ियों, ईडब्ल्यूएस वेलफेयर, स्कॉलरशिप, अवॉर्ड और किशोरी योजना से जुड़े करोड़ों रुपये शामिल हैं। इसके अलावा एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की 114 करोड़ रुपये की ट्यूशन फीस तथा दिल्ली सरकार के अधीन कॉलेजों में 538 करोड़ रुपये की देनदारी भी चुकाई गई है। उन्होंने पीडब्ल्यूडी परियोजनाओं में अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि एक मामले में बिना काम किए 250 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जो पिछली सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डीटीसी 99,000 करोड़ रुपये के घाटे में है और दिल्ली जल बोर्ड 91,000 करोड़ रुपये के नुकसान में चल रहा है। उन्होंने जल बोर्ड की बिलिंग प्रणाली को विफल बताते हुए कहा कि इसके कारण लोगों को अत्यधिक बिलों का सामना करना पड़ा। पिछली सरकार का कार्यकाल भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और जवाबदेही की कमी से भरा था, जहां लगातार नए घोटाले सामने आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश के साथ आगे बढ़ रही है ताकि बच्चों को समय पर किताबें, ड्रेस, स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक लैब और खेल सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने छात्रों की घटती संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि यह गंभीर सवाल है कि बच्चे स्कूल क्यों छोड़ रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार ने 4478 पदों को स्वीकृति दी है और 1194 नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कर्मियों को नियुक्ति दी है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने मुनक नहर पर 5000 करोड़ रुपये की लागत से एलिवेटेड रोड, मेट्रो विस्तार, प्रदूषण नियंत्रण के लिए ईवी ट्रांजिशन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और वॉल-टू-वॉल रोड कारपेटिंग जैसे कदम उठाए हैं। पहली बार 4200 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को वन घोषित किया गया है और चार वर्षों में 35 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, सरकार ने लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाया, फायर एनओसी को ऑनलाइन किया और 1.5 लाख से अधिक संपत्तियों में बिजली मीटर लगाने की अनुमति दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गरीबों और श्रमिकों के लिए 5 रुपये में भोजन उपलब्ध करा रही है और राशन कार्ड प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए व्यापक सुधार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि डुप्लीकेट और अपात्र लाभार्थियों को हटाकर नए पात्र लोगों को जोड़ा जा रहा है। साथ ही, सरकार ने डीबीटी के माध्यम से 853 रुपये सीधे खातों में ट्रांसफर कर पारदर्शिता सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद दिल्ली सरकार केंद्र के साथ समन्वय बनाकर काम कर रही है और एलपीजी आपूर्ति जैसी चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव