चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी व विपक्षी नेताओं की गतिविधियां देशद्रोह से कम नहीं : रेखा गुप्ता

 


नई दिल्ली, 27 सितंबर (हि.स.)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों और नेताओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की बातें देशद्रोह से कम नहीं है। इनके ऊपर देशद्रोह का केस लगना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने रविवार को जनसेवा सदन में आयोजित पत्रकार वार्ता में विपक्षी नेताओं के लगाए जा रहे अनर्गल आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पारदर्शिता के साथ चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया और निर्णयों को जनता के सामने रख रहा है, क्या विपक्ष के शासनकाल में चुनाव आयोग इसी प्रकार पारदर्शी तरीके से काम करता था ? उन्होंने कहा कि मात्र एक अखबार में प्रकाशित खबर के आधार पर बेबुनियाद माहौल पैदा करना क्या विपक्ष को शोभा देता है? चुनाव आयोग ने एक-एक विषय को पूरी पारदर्शिता के साथ जनता के सामने रखा और स्पष्ट किया है कि निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछने का अधिकार सभी को है, लेकिन सवाल तथ्यों के आधार पर होने चाहिए। केवल राजनीतिक आरोप लगाकर किसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।

मुख्यमंत्री ने फॉर्म-6 को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म-6 को लेकर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मूल फॉर्म में बदलाव नहीं किया गया है। एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित घोषणा को अलग से जोड़ा गया है। चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर वर्तमान में भी नए मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 और उससे संबंधित घोषणा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और सुलभ बनाया जा रहा है। मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखना तथा मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट अथवा अन्य कारणों से अपात्र हो चुकी प्रविष्टियों को नियमानुसार सत्यापित करना है।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर कहा कि मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया में वर्षों से मृत हो चुके व्यक्तियों, डुप्लीकेट प्रविष्टियों, स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं और अन्य कारणों से अमान्य हो चुकी प्रविष्टियों की पहचान की जाती है। उन्होंने कहा कि वास्तविक पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बने रहें और अपात्र या डुप्लीकेट नाम हटाए जाएं, यह चुनावी प्रक्रिया की स्वाभाविक आवश्यकता है। चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया में भी मतदाता सूची के सत्यापन, दावों और आपत्तियों के लिए निर्धारित प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि वर्षों पहले जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी थी, जिनके नाम डुप्लीकेट थे या जो अस्तित्व में ही नहीं थे, जब ऐसे नामों का सत्यापन और सुधार हुआ और वास्तविक मतदाता सामने आए, तो विपक्ष को परेशानी क्यों हो रही है?

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट जनादेश मिला था। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि उस समय चुनाव आयोग की व्यवस्था कौन संभाल रहा था और क्या उस समय चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर इसी प्रकार के सवाल उठाए गए थे? उन्होंने कहा कि केवल चुनाव परिणाम अपनी अपेक्षा के अनुरूप न आने पर चुनावी व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आप जनता को गुमराह करने के लिए जितना भी मिथ्या प्रचार कर लें, जनता सब देख रही है। एक-एक बात का जवाब जनता देगी। झूठ के कभी पांव नहीं होते।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों और नेताओं की जिम्मेदारी है। यदि किसी राजनीतिक दल को चुनावी प्रक्रिया पर कोई आपत्ति है तो उसे निर्धारित संवैधानिक और कानूनी माध्यमों से अपनी बात रखनी चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार बिना ठोस प्रमाण के लगातार आरोप लगाकर देश में अविश्वास का वातावरण पैदा करना लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर करने वाली गतिविधियों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरीके की गतिविधियां राहुल गांधी और विपक्ष का कोई भी नेता इस तरह की बातें कर रहा है, वह समझती हैं कि वह देशद्रोह से कम नहीं है। इनके ऊपर देशद्रोह का केस लगना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बिना पर्याप्त आधार के सवाल उठाकर जनता में भ्रम पैदा करना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार चुनाव आयोग पात्र मतदाताओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने तथा मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग की ओर से एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों और प्रक्रियाओं को लेकर स्पष्टीकरण दिया गया है। लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च है और अंततः जनता तथ्यों, काम और नीतियों के आधार पर अपना निर्णय करती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव