साहित्य अकादमी के साहित्योत्सव-2026 का शुभारंभ

 




नई दिल्ली, 30 मार्च (हि.स.)। दिल्ली स्थित साहित्य अकादमी ने सोमवार को प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले ‘साहित्योत्सव 2026’ का शुभारंभ किया। इसका उद्घाटन साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने किया।

रवींद्र भवन परिसर में 30 मार्च से 4 अप्रैल 2026 तक आयोजित किए जा रहे इस साहित्योत्सव में 100 से अधिक सत्रों में 650 से अधिक प्रसिद्ध लेखक और विद्वान सहभागिता कर रहे हैं। इसमें देश की 50 से अधिक भाषाओं का भी प्रतिनिधित्व होगा।

भारतीय प्रवासी लेखन सत्र की अध्यक्षता श्यामा प्रसाद गांगुली ने की और कैलाश नारायण तिवारी, रेखा सेठी और सोनू सैनी ने अपने विचार व्यक्त किए। रंगमंच में परंपराओं के सम्मिश्रण विषय पर पैनल चर्चा की अध्यक्षता भानु भारती ने की और उसमें हिंदी, कन्नड, कोंकणी, मराठी, ओड़िआ, पंजाबी और संस्कृत के रंगमंच विशेषज्ञों ने अपने तथ्य रखे।

भारत में प्रकाशन के बदलते परिदृश्य विषय पर हुई पैनल चर्चा की अध्यक्षता राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक ने की तथा अरुण माहेश्वरी (वाणी प्रकाशन) और मिली ऐश्वर्या (पेंगुइन बुक्स) ने अपने विचार व्यक्त किए। युवराज मलिक ने हाल ही में आयोजित किए गए विश्व पुस्तक मेले के आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि जहाँ पुस्तकों की बिक्री बढ़ी वहीं उसमें आने वाले 41 प्रतिशत वह युवा थे जो अभी कॉलेज में पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रकाशन की दुनिया बदलाव के दौर से अवश्य गुज़र रही है लेकिन स्थितियाँ बहुत आशाजनक हैं।

अरुण माहेश्वरी ने कहा कि एआई के आने के बाद मौलिक सामग्री प्रकाशित करने की चुनौती बढ़ी है लेकिन इसके चलते साहित्य को कोई खतरा नहीं है।

मिली ऐश्वर्या ने नकली किताबों से प्रकाशन व्यापार को हो रहे नुकसान की चर्चा करते हुए कहा कि इसे सजग पाठक ही रोक सकते हैं। इस चर्चा में क्षेत्रीय भाषाओं के प्रकाशन की महत्ता, उसके अनुवाद और कथेतर साहित्य की बढ़ती लोकप्रियता पर भी कई रोचक तथ्य सामने आए।

इसमें 15 सत्रों में 80 से ज्यादा लेखकों और विद्वानों ने सहभागिता की। भारतीय नदियों के नाम पर निर्मित किए गए सभागारों में पूर्वाह्न 10.00 बजे से शाम 4.00 बजे तक विभिन्न कार्यक्रमों में बहुभाषी कविता-पाठ, कहानी-पाठ, अस्मिता, फंतासी कहानी-पाठ, आदिवासी कवि सम्मिलन के साथ ही भारतीय प्रवासी लेखन, कविता में लय, ध्वनि और भावनाएं, लेखक विहिन साहित्य, रंगमंच में परंपराओं का सम्मिश्रण, साहित्य भी है चिकित्सा का विधान, साहित्य में प्रकृति का प्रतिबिंबन और भारत में प्रकाशन के बदलते परिदृश्य विषय पर पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं।

इस अवसर पर साहित्य अकादमी की उपाध्यक्ष कुमुद शर्मा, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की अतिरिक्त सचिव अमिता प्रसाद सरभाई, निदेशक अनीश पी. राजन एवं साहित्य अकादमी की सचिव पल्लवी प्रशांत होळकर भी उपस्थित रहीं।

साहित्योत्सव का मुख्य आकर्षण साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 अर्पण समारोह मंगलवार को कमानी सभागार में शाम 5ः00 बजे होगा। पुरस्कार-अर्पण समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात लेखक और अकादमी के महतर सदस्य विश्वनाथ प्रसाद तिवारी होंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी