देश में मुसलमानों के प्रति बने हालात से निपटने के लिए 51 सदस्यीय कमेटी बनाने का ऐलान

 


- मुस्लिम उलेमा, बुद्धिजीवियों, सूफियों की मीटिंग के बाद महबूबा मुफ्ती, सलमान खुर्शीद, मोहम्मद अदीब, मौलाना कल्बे जवाद, सरवर चिश्ती वगैरह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सा़झा की जानकारी

नई दिल्ली, 25 जुलाई (हि.स.)। भारतीय मुसलमानों से जुड़े वर्तमान मुद्दों और समस्याओं पर विचार करते हुए देशभर के विभिन्न क्षेत्रों से आए उनके प्रतिनिधियों की एक मीटिंग में 51 सदस्यीय कमेटी बनाने की घोषणा की गई। इसके साथ मीटिंग में यह भी तय किया गया कि तीन महीने बाद एक और मीटिंग की जाएगी, जिसमें इसमें हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी। यह जानकारी इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गईं।

उल्लेखनीय है कि इंडियन मुस्लिम्स फॉर सिविल राइट्स (आईएमसीआर) के चेयरमैन एवं पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब के प्रयासों से एक दिन पूर्व कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में लिए गए फसलों के बारे में जानकारी देने के लिए इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया जिसमें जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के सलाहकार मोहम्मद अली शब्बीर, जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान, मजलिस-ए-उलेमा हिंद के महासचिव मौलाना कल्ब जव्वाद, दरगाह अजमेर के सज्जादानशीन सरवर चिश्ती, बिहार के पूर्व मंत्री अली अशरफ फातमी, एपीसीआर के संयोजक नदीम खान और आईएमसीआर के महासचिव मोहम्मद आजम बेग आदि ने भाग लिया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि 2019 में संविधान बदलने के बाद जो जम्मू-कश्मीर में हो रहा है, वही अब पूरे देश में होने जा रहा है। पार्टियों को तोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि बात मुसलमानों की नहीं है, आने वाले दिनों में हिंदू भाइयों के वोट की भी कोई कीमत नहीं रहेगी। जंतर-मंतर पर धरना देने वाले बच्चों ने हमें सिखाया है कि हिंदु-मुसलमान से ऊपर उठकर हमें देश के लिए खड़ा होना चाहिए।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि हम लोकतांत्रिक तरीके अपनाकर सरकार से बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने बात की होती तो आज बच्चों को जंतर-मंतर पर नहीं बैठना पड़ता। हमने कोशिश की है कि बातचीत को कैसे आगे बढ़ाया जाए। पूर्व सांसद और आईएमसीआरके चेयरमैन मोहम्मद अदीब ने कहा कि यह पहली बार है, जब भारतीय मुसलमानों के अहम लोग एक मंच पर बैठे क्योंकि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। यह कोई मीटिंग नहीं बल्कि सोच-विचार और मनन का एक समारोह था। आज सरकारी संस्थाओं पर कब्जे हो रहे हैं और उन्हें बर्बाद किया जा रहा है। आरएसएस के लोग अब नियुक्तियां कर रहे हैं। जामिया और अलीगढ़, यहां तक कि जौहर यूनिवर्सिटी पर भी कब्जे हो गए हैं। जामिया में सावरकर की शताब्दी मनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि आज देश एकजुट है और सरकार से मांग कर रहा है कि आइडिया ऑफ इंडिया को नजरअंदाज न किया जाए, नहीं तो देश बर्बाद हो जाएगा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री

एमए फातमी ने कहा कि शिक्षण संस्थानों को वर्तमान सरकार बर्बाद कर रही है, बजट बढ़ाने की जगह घटाने का काम कर रही है। मदरसों को निशाना बनाया जा रहा है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जौहर यूनिवर्सिटी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

मलिक मोतसिम खान ने भी मीटिंग को सफल बताया और कहा कि हमें एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा। हमें ज़ुल्म और नाइंसाफी के खिलाफ मजबूती से आवाज़ उठानी होगी। सरवर अली चिश्ती ने कहा कि दरगाह अजमेर शरीफ सेक्युलरिज्म, डेमोक्रेसी और संविधान को बनाए रखने वाली है, लेकिन 2007 में इस पर हमला हुआ और अब इसे मंदिर कहा जा रहा है, जो शर्मनाक है। अब अगर हम बोलते हैं, तो हमें जिहादी कहा जाता है, हमें एंटी-नेशनल कहा जाता है, हमें टेररिस्ट कहा जाता है। लेकिन क्या हमें इस डर से चुप रहना चाहिए? हमें बोलना होगा। हम हुसैनी हैं, इसलिए हम ज़ुल्म के खिलाफ चुप नहीं रह सकते।

मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि बीजेपी की तरह कांग्रेस भी मुसलमानों की गुनहगार है, उसने सबसे ज़्यादा नाइंसाफी की है और हमें बर्बाद किया है। उन्होंने कहा कि हमें हिंदुओं को साथ लेकर अपनी समस्याओं को हल करना होगा। केवल मुस्लिम सरकार से नहीं लड़ सकते। मोहम्मद अली शब्बीर ने कहा कि जैसे हम देश की आज़ादी के लिए एक साथ लड़े, तेलंगाना के लिए लड़े, वैसे ही आज हमें देश में हो रही नाइंसाफी और ज़ुल्म के खिलाफ एक साथ लड़ना है। हमें अपने संविधान की रक्षा के लिए लड़ना है।

हिन्दुस्थान समाचा/मोहम्मद ओवैस

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हिन्दुस्थान समाचार / मोहम्मद शहजाद