प्रकृति का अनुशासन ही विश्व को राह दिखाएगा: डॉ. सच्चिदानंद जोशी
नई दिल्ली, 21 अप्रैल (हि.स.)। आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने मंगलवार को यहां कहा कि प्रकृति प्रदत्त अनुशासन ही हमें जीवन का मार्ग दिखाता है, यही अनुशासन आने वाले समय में विश्व को राह दिखाने वाला है।
डॉ जोशी ने यह बात दिल्ली स्थित इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में जीविका आश्रम के संस्थापक आशीष गुप्ता द्वारा संपादित पुस्तक ‘श्री रविन्द्र शर्मा गुरुजी समग्र’ के लोकार्पण एवं विमर्श कार्यक्रम में कही।
अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा, दुनिया जिस तरह के संकटों से जूझ रही है, उसे देखते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा और जीवन मूल्यों की आवश्यकता और बढ़ गई है। हमारी परंपराएं हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीना सिखाती हैं, जो आज के समय की सबसे बड़ी मांग है।
डॉ जोशी ने बताया कि विचार की दृष्टि से, चिंतन की दृष्टि से जब हम भारतीय ज्ञान परम्परा की बात कहते हैं तो इसका संदर्भ सिर्फ पाठ्यक्रमों तक सीमित न रहकर जीवन में कैसे उतर सकता है, यह गुरुजी का जीवन दर्शन बताता है।
मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक सुरेश सोनी ने कहा कि हमारे यहां पर कहा गया कि हमारा जीवन तीन स्तर पर जीवन चलता है। एक अनुभूति का धरातल रहता है, दूसरा विचार का धरातल रहता है और तीसरा व्यवहार का धरातल रहता है और फिर हमारे यहां तीनों में कोई भेद नहीं है जो अनुभूति में है, वही विचार में व्यक्त है और जो विचार में है, वो व्यवहार में व्यक्त है। और गुरुजी उसे व्यवहार के अंदर बता रहे हैं। वो जो व्यवहार में बता रहे हैं, वो हमारे विचारों में भी व्यक्त है और वो हमारे पूर्वजों की अनुभूतियों में भी व्यक्त है। यह निरंतरता में है।
उद्घाटन सत्र में जहां रविन्द्र शर्मा ‘गुरुजी’ के जीवन, कार्यों और विरासत पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘क्रांतदर्शी गुरुजी’ के टीजर लॉन्च किया गया, वहीं इस एकदिवसीय आयोजन का समापन इसी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्म के प्रदर्शन के साथ हुआ।
मुख्य अतिथि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह तथा विशिष्ट अतिथि केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने अपने उद्बोधनों में भारतीय चिंतन पर आधारित शिक्षा मॉडल, स्वदेशी ज्ञान-विज्ञान और सांस्कृतिक स्वाभिमान के महत्व को रेखांकित किया।
इस अवसर पर ‘भारत गाथा’ एवं ‘भारत कथा’ शृंखला के 15 खंडों का औपचारिक लोकार्पण किया गया। उद्घाटन सत्र के उपरांत आयोजित कार्यशाला के प्रथम सत्र ‘भारत गाथा’ में रविन्द्र शर्मा गुरुजी के विचारों पर आधारित वीडियो प्रस्तुति दिखाई गई। इसके बाद ‘शिक्षाविधि, प्रौद्योगिकी, घर-व्यवस्था’ विषय पर गांधी आश्रम के श्री लक्ष्मी दास ने अपने विचार रखे। आईआईटी दिल्ली के प्रो. विजय चेरीयार ने भारतीय ज्ञान प्रणाली, डिजाइन, कला और समाज व्यवस्था के अंतर्संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। वहीं एलबीएसएनएसयू, दिल्ली के कुलसचिव प्रो. पवन कुमार शर्मा ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था और भारतीय समाज व्यवस्था के आधारभूत तत्त्वों पर अपना व्याख्यान दिया।
द्वितीय सत्र ‘भारत कथा’ में पुनः गुरुजी के विचारों की वीडियो प्रस्तुति के साथ चर्चा प्रारम्भ हुई। आशीष गुप्ता ने ‘मसूरी संवाद’ और ‘विजयनगर संवाद’ पर अपने विचार रखे। सेवा इंटरनेशनल के डॉ. आर.के. अनिल ने ‘आदिलाबाद संवाद’ विषय पर प्रस्तुति दी। इस सत्र की अध्यक्षीय संबोधन जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलसचिव प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी ने दी।
दिनभर चले इस आयोजन में भारतीय ज्ञान परम्परा, शिक्षा-दर्शन, समाज व्यवस्था, ग्राम्य जीवन, तकनीक, स्वदेशी दृष्टि और सांस्कृतिक पुनर्जागरण जैसे विषयों पर सारगर्भित चर्चा हुई।
इस मौके पर आईजीएनसीए के कलाकोश के विभागाध्यक्ष एवम भारत विद्या प्रयोजना के निदेशक प्रो. (डॉ.) सुधीर लाल, प्रो. (डॉ.) सुधीर लाल सहित अन्य विद्वानों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों तथा संस्कृति-जगत से जुड़े गणमान्य जन उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी