(लीड) नारी शक्ति से राष्ट्र निर्माण: दिल्ली में 7-8 मार्च को 'भारती' महिला विचारक सम्मेलन का आयोजन

 


नई दिल्ली, 28 फरवरी (हि.स.)। महिला सशक्तीकरण और राष्ट्र के विकास में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करने के लिए यहां के विज्ञान भवन में 7-8 मार्च को दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला विचारक सम्मेलन 'भारती' का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी राष्ट्र सेविका समिति, शरण्या और भारतीय विद्वत परिषद के पदाधिकारियों ने दिल्ली में कस्तूरबा गांधी मार्ग स्थित सिविल सेवा अधिकारी संस्थान में शनिवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी।

इस सम्मेलन का उद्घाटन दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता करेंगी तथा समापन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में होगा। इसका आयोजन भारतीय विद्वत परिषद, राष्ट्र सेविका समिति और शरण्या ने संयुक्त रूप से किया है। यह कार्यक्रम भारती- नारी से नारायणी विषय पर आधारित होगा। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों की प्रबुद्ध महिलाओं को एक मंच पर लाना और 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को साकार करने में उनके योगदान पर चर्चा करना है। इस सम्मेलन में आठ प्रमुख विषयों पर गहन विमर्श किया जाएगा। इनमें विद्या आत्मनिर्भरता मुक्ति चेतना प्रकृति संस्कृति सिद्धि और कृति शामिल हैं। इसके अलावा मुख्य सत्र पैनल चर्चा विशेषज्ञ शिक्षण सत्र पोस्टर प्रदर्शनी और कलात्मक प्रस्तुतियां शामिल होंगी।

राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख कार्यवाहिका सीता गायत्री ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि दुनिया जहां महिला-पुरुष को प्रतिस्पर्धी मानती है वहीं भारत उन्हें एक-दूसरे का पूरक मानता है। आज समय है कि भारतीय महिलाएं अपने 'मातृत्व' और 'कर्तृत्व' के गुणों के साथ-साथ 'नेतृत्व' के गुण को भी विस्तार दें। इस कार्यक्रम का ध्येय विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं को एकजुट कर उन्हें एक ऐसा मंच प्रदान करना है जहां से वे समाज के नव-निर्माण का नेतृत्व कर सकें।

भारतीय विद्वत परिषद की सचिव प्रो. शिवानी वी ने कहा कि हमने महिलाओं के विकास और शिक्षा से जुड़े 8 खास विषयों को चुना है। इस चर्चा में कानून, शिक्षा, पत्रकारिता और प्रशासन जैसे हर क्षेत्र की अग्रणी महिलाएं जुटेंगी। हमारा मकसद सिर्फ चर्चा करना नहीं बल्कि उन ठोस सुझावों और नए विचारों पर काम करना है जो महिलाओं के भविष्य को संवारने में मददगार साबित हों। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आने के लिए अपनी सहमति दे दी है। बहुत सारे उच्च स्तर के पदों पर जो महिलाएं हैं उन्हें भी इस चर्चा सत्र के लिए बुलाया गया है।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में देशभर से लगभग 1500 महिला विचारक शिरकत कर रही हैं। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों की 200 से अधिक विशेषज्ञ महिलाओं को मुख्य वक्ता और 'चिंतक' के रूप में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा महिला सांसदों विश्वविद्यालय की महिला कुलपतियों और आध्यात्मिक गुरुओं के लिए अलग-अलग खास सत्र भी रखे गए हैं ताकि हर क्षेत्र से अच्छे विचार सामने आ सकें।

राष्ट्र सेविका समिति दिल्ली प्रांत की प्रचार प्रमुख डॉ. रचना वाजपेयी ने बताया कि इस सम्मेलन का केंद्र केवल 'महिला सशक्तीकरण' तक सीमित नहीं है बल्कि अब यह 'महिला नेतृत्व में प्रगति' की ओर अग्रसर है। विभिन्न क्षेत्रों, क्षेत्रों और पीढ़ियों की महिलाओं को एक मंच पर लाना जरूरी है ताकि वे सामूहिक रूप से भविष्य के भारत के विकास में अपना निर्णायक योगदान दे सकें।

ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं के लिए दिल्ली भ्रमण पर पूछे गए सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि भ्रमण से कहीं अधिक महत्वपूर्ण चेतना का जागरण है। जब ये महिलाएं एक-दूसरे से मिलेंगी तो उन्हें स्वयं ही इस आयोजन के गहरे उद्देश्य का बोध हो जाएगा।

केकेएसयू की मीडिया प्रमुख डॉ रेणुका बोकरे ने बताया कि यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं बल्कि एक 'बीज' है जिसे भविष्य में महिला सशक्तीकरण के एक विशाल 'वटवृक्ष' के रूप में विकसित करने की योजना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना ‘सक्षम नारी, समृद्ध भारत’ है इसी सपने को धरातल पर उतारने के लिए हम लाए हैं यह परिषद, जिसका उद्देश्य महिलाओं की 'मौन शक्ति' को एक 'रणनीतिक बल' में बदलना है। हम भारत की सभी महिलाओं के लिए एक ऐसा साझा मंच बना रहे हैं जहां वे अपनी बातें कह सकें। हम उनके संघर्षों में एक 'सखी' की तरह साथ खड़े होंगे और उनकी हर सफलता के 'साक्षी' बनकर उन्हें दुनिया के सामने गौरवान्वित करेंगे।

इस दौरान चार विशेष पैनलों के माध्यम से बहुआयामी विचार-मंथन होगा। महिला सांसदों का एक राष्ट्रीय पैनल ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर चर्चा करेगा। महिला कुलपतियों का अलग पैनल आयोजित होगा। ‘साध्वी संगम’ पैनल योग, धर्म और अध्यात्म के संगम पर विचार करेगा।

सम्मेलन की मुख्य संरक्षक एवं राष्ट्र सेविका समिति की अध्यक्ष वी. शांता कुमारी (शांतक्का), साध्वी ऋतंबरा, शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, केंद्रीय परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहेंगे।

इसमें शिक्षा, रक्षा विज्ञान, साहित्य और न्यायपालिका जैसे विभिन्न क्षेत्रों से विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन के अंत में केन्द्र सरकार को महत्वपूर्ण नीतिगत सुझाव सौंपे जाएंगे और महिला विचारकों का एक राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार किया जाएगा ताकि महिला नेतृत्व की यह मुहिम हर वर्ष जारी रह सके। इसकी पंजीकरण की अंतिम तिथि 28 फरवरी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी