वाहन प्रदूषण पर पीएसी रिपोर्ट के क्रियान्वयन के लिए 31 जनवरी तक का समय
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली में बढ़ते वाहन प्रदूषण को लेकर विधानसभा सचिवालय ने कड़ा रुख अपनाया है। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के निर्देशों के बाद लोक लेखा समिति (पीएसी) की तीसरी रिपोर्ट पर कार्रवाई तेज कर दी गई है।
विधानसभा सचिवालय के अनुसार यह रिपोर्ट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा ‘दिल्ली में वाहन जनित वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण’ पर किए गए प्रदर्शन ऑडिट पर आधारित है।
विधानसभा सचिवालय ने दिल्ली के परिवहन मंत्री और परिवहन आयुक्त को औपचारिक पत्र भेजकर सिफारिशों पर जवाब मांगा है। सरकार को निर्देश दिया गया है कि 31 दिसंबर 2026 तक सभी सिफारिशों के क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट की जाए और इसकी अंतिम रिपोर्ट 31 जनवरी 2027 तक विधानसभा सचिवालय को अनिवार्य रूप से प्रस्तुत की जाए।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि वाहन जनित वायु प्रदूषण से निपटने के लिए समन्वित और समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है और संस्थागत प्रक्रियाओं को ऑडिट के निष्कर्षों को जमीनी स्तर पर ठोस परिणामों में बदलना चाहिए। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की प्रदूषण के प्रति प्रतिक्रिया केवल छोटे-छोटे उपायों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने बसों की कमी, सीमित रूट कवरेज, कमजोर लास्ट माइल कनेक्टिविटी, रूट रेशनलाइजेशन में देरी और वैकल्पिक परिवहन प्रणालियों के धीमे क्रियान्वयन पर चिंता जताई। इन कारणों से लोगों की निजी वाहनों पर निर्भरता बढ़ती है, जिससे शहरी ढांचे और वायु गुणवत्ता पर दबाव बढ़ता है।
प्रवर्तन से जुड़ी चुनौतियों पर बात करते हुए, अध्यक्ष ने कहा कि वाहन उत्सर्जन मानकों का पालन समान रूप से नहीं हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में पुराने वाहनों की मौजूदगी और उनके स्क्रैपिंग व पंजीकरण समाप्त करने की धीमी प्रक्रिया ने समस्या को और बढ़ाया है।गुप्ता ने कहा कि वाहन उत्सर्जन से निपटने के लिए व्यापक और सतत दृष्टिकोण जरूरी है, जिसमें मजबूत निगरानी व्यवस्था, नियमों का सख्त पालन, सार्वजनिक परिवहन का विस्तार, स्वच्छ परिवहन विकल्पों को बढ़ावा और बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय पर सही कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी