चक्रवात 'अर्नब' विशाखापत्तनम और यानम के बीच तट से टकराएगा, समुद्र में 14 मीटर ऊंची लहरें उठने की आशंका
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (हि.स.)। भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि चक्रवात 'अर्नब' विशाखापत्तनम और यानम के बीच तट से टकराएगा। इस दौरान हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि हवा के तेज झोंकों की गति 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने का अनुमान है।
डॉ. महापात्रा ने मीडिया को बताया कि चक्रवात अर्नब के कारण तेज हवाओं से बिजली और संचार व्यवस्था बाधित हो सकती है। आंध्र प्रदेश के प्रभावित क्षेत्रों में धान की खड़ी फसल और बागवानी फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचने की आशंका है। मौसम विभाग ने समुद्र में खराब परिस्थितियों को देखते हुए समुद्री परिवहन को लेकर भी आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है।
समुद्र में 14 मीटर तक ऊंची लहरें उठने की आशंका
चक्रवात के प्रभाव से समुद्र में स्थिति बेहद खतरनाक बनी हुई है। समुद्र में 14 मीटर तक ऊंची लहरें उठने की आशंका जताई गई है। ऐसे हालात में जहाजों और नावों का संचालन जोखिम भरा हो सकता है। चक्रवात के साथ उठने वाली समुद्री लहरों और ज्वार के कारण तटीय इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने की भी आशंका है।
डॉ. महापात्रा ने बताया कि आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में समुद्र का जलस्तर सबसे अधिक बढ़ सकता है। यहां 1 से 1.5 मीटर तक ऊंची तूफानी लहरें उठने का अनुमान है। इससे निचले इलाकों में समुद्र का खारा पानी भर सकता है।
आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, 27 और 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तथा ओडिशा में भारी से अत्यंत भारी बारिश होने की संभावना है। तट पार करने के बाद चक्रवात के उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने का अनुमान है। इसका असर दक्षिणी ओडिशा के कुछ हिस्सों, उससे सटे छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों और तेलंगाना के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में भी पड़ सकता है।
तेज हवाओं, भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों को देखते हुए तटीय इलाकों में सतर्कता बरतना जरूरी है।
बांगलादेश ने रखा चक्रवात तूफान का नाम अर्नब
इस तूफान का नामकरण बांगलादेश ने किया है। बंगाली भाषा में अर्नब का मतलब महासागर या फिर समुद्र होता है। शायद इसी वजह से इस तूफान का नाम अर्नब रखा गया है और इसे उत्तरी हिंद महासागर में आने वाले चक्रवातों के लिए इस्तेमाल होने वाली नामकरण प्रणाली के तहत सुझाया गया था।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी