इटली के कला महाकुंभ में दिखेगी भारत की सांस्कृतिक विरासत की झलक
- ला बिएनाले डी वेनेज़िया में भारत की वापसी हमारे सांस्कृतिक आत्मविश्वास का प्रतीक हैः शेखावत
नई दिल्ली, 02 फरवरी (हि. स.)। संस्कृति मंत्रालय ने इटली के वेनिस में आयोजित 61वें अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी ला बिएनाले डी वेनेज़िया में भारत का पवेलियन प्रस्तुत किया। इसमें दर्शकों को भारत की सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी।
संस्कृति मंत्रालय के अनुसार इस पवेलियन में जियोग्राफ़ीज़ ऑफ़ डिस्टेंस: रिमेंबरिंग होम शीर्षक वाली यह प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी, जो वैश्विक प्रवासी समुदायों और भारत की सांस्कृतिक गहराई को एक नए परिप्रेक्ष्य में पेश करेगी। यह पवेलियन संस्कृति मंत्रालय नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र (एनएमएसीसी) और सेरेन्डिपिटी आर्ट्स फाउंडेशन के सहयोग से प्रस्तुत करेगा। प्रदर्शनी का क्यूरेशन कला विशेषज्ञ डॉ. अमीन जाफ़र ने किया है। उन्होंने इस परियोजना को ला बिएनाले डि वेनेज़िया के मुख्य विषय 'इन माइनर कीज़' के अनुरूप तैयार किया है, जिसे दिवंगत क्यूरेटर कोयो कौओह द्वारा परिकल्पित किया गया है।
यह प्रदर्शनी वेनिस (आर्सेनाले) में आगामी 9 मई से 22 नवंबर 2026 तक चलेगी। इसके पूर्वावलोकन 6, 7 और 8 मई 2026 को होंगे।
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि ला बिएनाले डी वेनेज़िया में भारत की वापसी हमारे सांस्कृतिक आत्मविश्वास का प्रतीक है। हमारा पवेलियन एक ऐसे समकालीन भारत को प्रदर्शित करेगा जो अपनी सभ्यतागत स्मृति से जुड़ा है और आज की वैश्विक दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है।
उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी इस विचार पर केंद्रित है कि 'घर' केवल एक भौतिक स्थान नहीं बल्कि स्मृतियों, रीति-रिवाजों और व्यक्तिगत मिथकों का एक गतिशील संग्रह है। प्रदर्शनी में भारत के पांच दिग्गज कलाकार अपनी कृतियों के माध्यम से 'घर' के प्रति भावनात्मक जुड़ाव को प्रदर्शित करेंगे। इनमें अलवर बालासुब्रमण्यम (बाला): तमिलनाडु की मिट्टी और प्राकृतिक परिदृश्य के साथ संवाद, सुमाक्षी सिंह कढ़ाई के धागों से बनी वास्तुशिल्प कलाकृतियां, रंजनी शेट्टार कर्नाटक की शिल्प परंपरा और जैविक सामग्रियों से बनी गुरुत्वाकर्षण-रोधी मूर्तियां, आसिम वक़ीफ़ बेकार पड़ी सामग्रियों के पुन: उपयोग से स्थिरता पर केंद्रित कला और स्कार्मा सोनम ताशी लद्दाख के पारिस्थितिकी और सांस्कृतिक संरक्षण पर आधारित पेपर माशे कला को प्रदर्शित करेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि भारत का यह पवेलियन न केवल देश की कलात्मक विविधता को दर्शाएगा बल्कि तेजी से बदलते शहरी परिवेश और प्रवासन के बीच अपनी जड़ों से जुड़े रहने की भारतीय भावना को भी विश्व के सामने रखेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी