दिल्ली में स्वामी हरिदास–तानसेन संगीत नृत्य महोत्सव 2026 का शुभारंभ

 


नई दिल्ली, 09 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली में शुक्रवार को शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की समृद्ध परंपरा को समर्पित 27वां ‘स्वामी हरिदास- तानसेन संगीत नृत्य महोत्सव 2026’ का शुभारंभ किया गया।

तीन दिवसीय उत्सव के पहले दिन की शास्त्रीय प्रस्तुति से बाराखंबा रोड स्थित मॉडर्न स्कूल का शंकर लाल हॉल दर्शकों की तालियों से गूंज उठा।

इस मौके पर भारतीय संगीत सदन की निदेशक और संस्थापक पद्म भूषण डॉ. उमा शर्मा ने कहा, “महोत्सव का प्रत्येक संस्करण हमारी शास्त्रीय विरासत को समर्पित एक विनम्र अर्पण है। उद्घाटन दिवस भारतीय शास्त्रीय कलाओं की शुद्धता को संरक्षित रखने और युवा पीढ़ी को इन शाश्वत परंपराओं से जोड़ने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

श्रीराम सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स के प्रबंध न्यासी डॉ विनय भारत राम ने कहा कि पहले दिन की ऊर्जा और दर्शकों की प्रतिक्रिया यह सिद्ध करती है कि आज भी भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य पूरी तरह प्रासंगिक हैं। यह महोत्सव परंपरा, साधना और जीवंत कलाओं के संगम का सशक्त मंच है।

महोत्सव के उद्घाटन संध्या में पं. विश्वमोहन भट्ट और पं. सलील भट्ट (मांगणियार कलाकारों के साथ), उस्ताद शुजात ख़ान तथा विदुषी अश्विनी भिड़े देशपांडे की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

पहले दिन का संध्याकाल एक अविस्मरणीय सांगीतिक अनुभव लेकर आया। एक ओर मोहन वीणा पर पं. विश्वमोहन भट्ट और सात्विक वीणा पर पं. सलील भट्ट की शास्त्रीय साधना थी, तो दूसरी ओर मांगणियार लोक कलाकारों की माटी की पुकार। हिंदुस्तानी संगीत की गहराई और राजस्थानी लोक की रूहानी खुशबू का यह मिलन श्रोताओं के हृदय को छू गया। इस सांगीतिक यात्रा में 'केसरिया बालम', राग विश्वरंजिनी, 'पायो जी मैंने राम रतन धन पायो' और 'वंदे मातरम्' जैसे भावपूर्ण गीतों और धुन को पिरोया गया था।

दूसरी प्रस्तुति में सितार पर उस्ताद शुजात खान ने इमदादखानी घराने की परंपरा को सजीव करते हुए अपनी सूक्ष्म बंदिशों, जटिल तानों और भावपूर्ण अभिव्यक्ति से श्रोताओं को बांधे रखा।

संध्या का समापन विदुषी अश्विनी भिड़े देशपांडे की भावप्रवण गायकी से हुआ। राग की गहन समझ, स्वर की शुद्धता और शांत, ध्यानात्मक प्रस्तुति ने संध्या को विशेष बना दिया और श्रोताओं पर गहरा प्रभाव छोड़ा।

महोत्सव के आगामी दो दिनों में भी शास्त्रीय कला के रसिकों के लिए समृद्ध प्रस्तुतियां होंगी।

दूसरे और तीसरे दिन उस्ताद अमान अली बंगश, पं. उल्हास कशालकर, पं. हरिप्रसाद चौरसिया (बांसुरी), डॉ. उमा शर्मा अपने शिष्यों के साथ (कथक), पं. राहुल शिवकुमार शर्मा तथा बेगम परवीन सुल्ताना (गायन) जैसे दिग्गज कलाकार मंच पर अपनी कला का जादू बिखेरेंगे। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम के दौरान प्रतिदिन प्रस्तुतियां शाम 6 बजे से शुरू होंगी।

-------------------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी