योग, ध्यान, शास्त्रीय संगीत और कला के जरिए ही विश्व शांति संभव हैः नंदिनी सिंगला
नई दिल्ली, 28 सितंबर (हि.स.)। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की महानिदेशक नंदिनी सिंगला ने सोमवार को कहा कि आईसीसीआरका उद्देश्य योग, ध्यान, शास्त्रीय संगीत और कला के जरिए भारत के इसी आध्यात्मिक एवं शांति के संदेश को पूरे विश्व में फैलाना है।
महानिदेशक नंदिनी सिंगला ने आज दिल्ली स्थित भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) में आयोजित ‘हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह’ में हिन्दुस्थान समाचार से कहा, यदि विश्व भारतीय दर्शन और चिंतन को समझे, तो युद्ध की संभावना ही समाप्त हो जाएगी। हमारी परंपरा में जब हम 'नमस्ते' करते हैं, तो इसका अर्थ है कि जो चेतना और प्राण मेरे भीतर हैं, वही सामने वाले में भी हैं। यही प्राण पशु-पक्षी और प्रकृति के हर कण में हैं। जब हम सभी को एक ही चेतना का हिस्सा मानेंगे, तो किसी पर प्रहार करना स्वयं पर प्रहार करने जैसा होगा।
उन्होंने कहा कि इस बार के कार्य़क्रम में विदेशी छात्रों को सीधे जोड़ने के लिए विशेष पहल की गई है। इसके तहत हिंदी सिनेमा, संगीत और लोकनृत्य पर आधारित क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इसके अलावा, छात्रों के लिए 'भारत मेरे दिल में बसता है' विषय पर एक निबंध प्रतियोगिता कराई गई, जिसमें छात्रों ने भारत के प्रति अपने गहरे जुड़ाव और अनुभवों को खूबसूरती से व्यक्त किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इन छात्रों को हिंदी के माध्यम से भारत की समृद्ध सभ्यता, संस्कृति और विरासत से जोड़ना है।
सिंगला ने बताया कि इस समय देश भर में लगभग आठ हजार विदेशी छात्र आईसीसीआर की पूर्ण छात्रवृत्ति (100 प्रतिशत छात्रवृत्ति) के तहत उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जो आगे चलकर वैश्विक स्तर पर भारत के सांस्कृतिक राजदूत बनते हैं। श्रीलंका की प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी अमरसूर्या हरिणी अमरसुरिया भी आईसीसीआर की छात्रा रही हैं और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी। इसके अलावा विश्व के कई देशों में मंत्री और सांसद जैसे उच्च पदों पर आईसीसीआर के पूर्व छात्र आसीन हैं। उन्होंने बताया कि भारत आने वाले विदेशी युवाओं को यहां की संस्कृति से सहज ही प्रेम हो जाता है।
महानिदेशक ने बताया कि परिषद के 'एलुमनाई पोर्टल' पर 20 हजार से अधिक पूर्व छात्र जुड़े हुए हैं और इसे जल्द ही संयुक्त अनुसंधान, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और कार्यशालाओं के लिए एक सक्रिय (लाइव) प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है।
समारोह का मुख्य आकर्षण दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू), दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू) और जीजीएसआई यूनिवर्सिटी सहित प्रमुख संस्थानों में अध्ययनरत विदेशी छात्रों की मौजूदगी रही। उज़्बेकिस्तान, यूक्रेन, रूस, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, मिस्र, कोस्टा रिका, कजाकिस्तान, लेसोथो, तजाकिस्तान, भूटान, म्यांमार और चीन सहित कुल 30 देशों के छात्र-छात्राओं ने हिंदी के प्रति अपने अनुभव और लगाव साझा किए।
दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी में पीएचडी करने वाली उज़्बेकिस्तान और यूक्रेन की शोध छात्राओं जिलोला, सबरीना, वेलेरिया और डायना ने हिंदी में अपने विचार रखे। इस दौरान जर्मनी और मिजोकामी (जापान) सहित अंतरराष्ट्रीय केंद्रों से जुड़े हिंदी प्रेमियों के विशेष वीडियो भी प्रदर्शित किए गए।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणामों की घोषणा की गई। मुझमें भारत बसता है और हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता के उत्कृष्ट प्रतिभागियों एवं विजेताओं को मंच से प्रमाण-पत्र व पुरस्कार वितरित किए गए।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी