कृषि अवशेष से बनेंगी सड़कें, सीएसआईआर ने बायो-बिटुमेन तकनीक का किया हस्तांतरण
नई दिल्ली, 30 मार्च (हि.स.)। बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने सोमवार को अपनी अभिनव तकनीक “लिग्नोसेलुलोसिक बायोमास से बायो-बिटुमेन– खेतों के अवशेष से सड़कों तक” के बड़े पैमाने पर औद्योगिक उपयोग के लिए तकनीक का हस्तांतरण किया।
सीएसआईआर में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह, सीएसआईआर की महानिदेशक एन. कलाईसेल्वी तथा विभिन्न मंत्रालयों, सीएसआईआर संस्थानों, उद्योग और नीति-निर्माताओं के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
शिवराज सिंह चौहान ने बायो-बिटुमेन तकनीक को ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताते हुए कहा कि य़ह तकनीक कृषि को बुनियादी ढांचे और नवाचार को जोड़ता है। यह तकनीक भारत के जलवायु लक्ष्यों, नेट ज़ीरो प्रतिबद्धताओं, आत्मनिर्भर भारत, राष्ट्रीय बायो-ऊर्जा मिशन और सर्कुलर इकोनॉमी जैसी पहलों के अनुरूप है। इसके उपयोग से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे और पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि यह पहल भारत की आत्मनिर्भरता, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और “वेस्ट टू वेल्थ” की सोच को दर्शाती है। यह तकनीक कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों के बीच प्रभावी समन्वय का उदाहरण है, जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी का महत्वपूर्ण योगदान है।
इस अवसर पर सीएसआईआर की महानिदेशक एन कलाइसेल्वी ने कहा कि यह विकास पेट्रोलियम-आधारित सामग्री से जैव-आधारित सामग्री की ओर एक बड़ा बदलाव है और यह संस्थान देश के विकास के लिए नई तकनीकों को आगे बढ़ाता रहेगा।
यह तकनीक सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान और सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान द्वारा विकसित की गई है। इसमें कृषि अवशेषों और बायोमास को थर्मो-केमिकल प्रक्रिया से परिवर्तित कर पर्यावरण-अनुकूल बायो-बिटुमेन बनाया जाता है।
यह नवाचार पारंपरिक पेट्रोलियम-आधारित बिटुमेन का एक नवीकरणीय और कम-कार्बन विकल्प प्रदान करता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी