रायपुर उपभोक्ता फोरम का आदेश : ई-20 पेट्रोल से खराब हुई कार, निर्माता कंपनी को नई गाड़ी या 21.60 लाख रुपये लौटाने का आदेश

 

रायपुर, 15 जुलाई (हि.स.)। रायपुर जिला उपभोक्ता फोरम ने छत्तीसगढ़ में ई-20 पेट्रोल से कार खराब होने के मामले में उपभोक्ता के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। फोरम ने कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह पीड़ित को 45 दिनों के भीतर नई ई-20 अनुकूल कार दे या फिर ₹21.60 लाख लौटाए।

आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कून्डु और सदस्य डॉ आनंद वर्गीस की पीठ ने माना कि कार का इंजन ई-20 पेट्रोल को सपोर्ट नहीं कर रहा था, जिसके चलते गाड़ी बार-बार खराब हो रही थी। उपभोक्ता आयोग ने माना कि यदि कार ई-20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं थी, तो कंपनी को ग्राहक को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। इसे 'सेवा में कमी' मानते हुए फोरम ने आज आदेश दिया है।

फोरम ने कार डीलर और निर्माता कंपनी को कड़ी फटकार लगाते हुए पीड़ित डॉक्टर को 45 दिनों के भीतर ई-20 सपोर्ट करने वाली उसी मॉडल की नई कार देने या फिर वाहन की पूरी कीमत ₹20,50,494 लौटाने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक प्रताड़ना के एवज में एक लाख रुपये और वाद व्यय के रूप में 10,000 (कुल करीब ₹21.60 लाख) का भुगतान करने कहा है। तय समय सीमा में भुगतान न करने पर सात फीसदी की दर से ब्याज भी देय होगा।

जानकारी के अनुसार, सड्डू (रायपुर) निवासी डॉ प्रेमराज देवता ने 03 जून 2024 को एक ‘ग्रैंड विटारा’ कार क्रय की थी। महज कुछ महीनों बाद 11 नवंबर 2024 को कार में अचानक तकनीकी खराबी आई। सर्विस सेंटर ने दावा किया कि यह मिलावटी पेट्रोल के कारण हुआ है। बार-बार मरम्मत और टंकी साफ करने के बाद भी कार खराब होती रही। जब पीड़ित ने मान्यता प्राप्त एसजीएस लैब से पेट्रोल की जांच कराई, तो पता चला कि पेट्रोल खराब नहीं था, बल्कि वह कार के इंजन के अनुकूल (कंफर्टेबल) नहीं था, जिससे इंजन चोक हो रहा था। वर्कशॉप द्वारा बार-बार रिपेयरिंग करने और पेट्रोल टंकी साफ करने के बावजूद कार लगातार खराब होती रही। इस दौरान डीलर और निर्माता कंपनी ने कार में किसी भी तरह की निर्माणगत त्रुटि होने से साफ इनकार कर दिया।

दूसरी ओर, जब उन्होंने पेट्रोल पंप से संपर्क किया तो पता चला कि किसी अन्य वाहन मालिक ने ऐसी कोई शिकायत नहीं की थी। जब कंपनी ने कार की री-सेल वैल्यू का मूल्यांकन महज ₹12 लाख लगाया, तो कोई रास्ता न देख पीड़ित डॉक्टर ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।

आयोग ने माना कि उपभोक्ता की कोई गलती नहीं थी। वाहन का इंजन देश में सप्लाई हो रहे ई-20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं था। ऐसे में यह निर्माता और डीलर की जिम्मेदारी है कि वे ग्राहक को सही उत्पाद मुहैया कराएं।

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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा