अमेरिकी विदेश मंत्री के 500 अरब डॉलर के आयात वाले बयान पर कांग्रेस का हमलावर, देश की विदेश नीति प्रभावित करने का जड़ा आरोप

 


नई दिल्ली, 24 मई (हि.स.)। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत द्वारा ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और कृषि क्षेत्रों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने वाले बयान पर कांग्रेस हमलावर है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत की विदेश नीति और व्यापार समझौतों से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों की जानकारी लगातार वॉशिंगटन से सामने आ रही है, जबकि नई दिल्ली की ओर से चुप्पी बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अमेरिका के सामने एकतरफा झुकाव दिखा रही है और इससे देश के आर्थिक एवं रणनीतिक हित प्रभावित हो रहे हैं।

जयराम रमेश ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि वर्तमान में भारत का वार्षिक आयात 52.9 अरब डॉलर के आसपास है। ऐसे में यदि अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने की प्रतिबद्धता का दावा सही है तो भारत को अमेरिका से अपने आयात में भारी वृद्धि करनी होगी। इससे देश की अर्थव्यवस्था, विदेशी मुद्रा भंडार और घरेलू उद्योगों पर असर पड़ सकता है।

रमेश ने आरोप लगाया कि अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा ट्रंप प्रशासन के टैरिफ से जुड़े फैसले को रद्द किए जाने के बाद मलेशिया जैसे देशों ने अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौतों को निरस्त घोषित कर दिया, लेकिन भारत सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया। संसद में राहुल गांधी द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जल्दबाजी में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए और इसमें अमेरिका को एकतरफा रियायतें दी गईं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री खुद विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन खपत कम करने और विदेश यात्राओं में संयम बरतने की अपील करते रहे हैं। ऐसे में अमेरिका से बड़े पैमाने पर आयात बढ़ाने की सहमति विरोधाभासी है। पिछले 12 महीनों में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 12 प्रतिशत कमजोर हुआ है। ऐसे समय में आयात बढ़ने से रुपये पर और दबाव पड़ सकता है।

रमेश ने उद्योगपति गौतम अदाणी से जुड़े मामले पर कहा कि हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने सौर ऊर्जा परियोजना से जुड़े कथित रिश्वत मामले में अदाणी के खिलाफ आपराधिक धोखाधड़ी के आरोप हटा दिए। रमेश ने सवाल किया कि क्या अमेरिका के साथ व्यापारिक फैसलों और अदाणी समूह को मिली राहत के बीच कोई संबंध है?

रमेश ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 10 मई 2025 को रुबियो ने सबसे पहले युद्धविराम की घोषणा की थी, जिसके बाद ऑपरेशन सिंदूर रुक गया। इस साल 21 मई को भी रुबियो ने सबसे पहले जानकारी दी थी कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति अगले सप्ताह भारत यात्रा पर आएंगे, जबकि उस समय तक भारत सरकार या वेनेजुएला की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के युद्धविराम, रूसी तेल और गैस आयात, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और वेनेजुएला के राष्ट्रपति की प्रस्तावित यात्रा जैसे मामलों में जानकारी नई दिल्ली के बजाय वॉशिंगटन से सामने आ रही है। इससे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की छवि प्रभावित हो रही है।

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि भारत ने अगले पांच वर्षों में ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और कृषि क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर