जाति जनगणना में विकल्प चुनने की सूची क्यों नहीं, सरकार जवाब दे: जयराम रमेश
नई दिल्ली, 18 अगस्त (हि.स.)। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने जाति जनगणना को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया कि जब मोदी सरकार ने 2021 में उच्चतम न्यायालय में दायर हलफनामे में जातियों का भरोसेमंद और एक समान आंकड़ा जुटाने के लिए विकल्प चुनने की सूची की जरूरत बताई थी, तो जनगणना 2027 में ऐसा विकल्प क्यों नहीं रखा गया है।
जयराम रमेश ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि 21 सितंबर 2021 को मोदी सरकार ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर जाति जनगणना की मांग को खारिज कर दिया था। हालांकि, इसी हलफनामे के पैरा 12 (डी) में सरकार ने कहा था कि जातियों की रजिस्ट्री तैयार करने के लिए जातियों के चयन को लेकर विकल्प चुनने की सूची देना बेहतर होता, जिससे भरोसेमंद और एक समान आंकड़े हासिल किए जा सकते हैं।
उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार ने खुद 2021 में उच्चतम न्यायालय के समक्ष जातियों का एक समान और विश्वसनीय आंकड़ा जुटाने के लिए विकल्प चुनने की सूची की जरूरत बताई थी, तो जनगणना 2027 में इसे शामिल क्यों नहीं किया गया है।
रमेश ने कहा कि बिहार और तेलंगाना में हुए जाति सर्वेक्षणों से पहले ऐसा विकल्प चुनने की सूची तैयार किया गया था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इसी 05 मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में इसी तरह के मेनू का सुझाव दिया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जाति जनगणना को लेकर गंभीर नहीं है और इसे रोकना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 30 अप्रैल 2025 को जाति जनगणना कराने की घोषणा कर अपना पुराना रुख बदला था।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर