भारत 6जी नेतृत्व और सुरक्षा के लिए ‘कॉल टू एक्शन’ पहल में हुआ शामिल

 

नई दिल्ली, 09 सितंबर (हि.स.)। भारत ने 6जी नेतृत्व और सुरक्षा के लिए वैश्विक ‘कॉल टू एक्शन’ पहल का समर्थन किया है। इसके साथ ही भारत उन 20 से अधिक देशों के समूह में शामिल हो गया है, जिन्होंने खुले, परस्पर-संचालित, सुरक्षित, लचीले और नवाचार आधारित अगली पीढ़ी के दूरसंचार नेटवर्क विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता जताई है।

संचार मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि इस पहल के तहत भारत की भागीदारी को आगे बढ़ाने और संबंधित गतिविधियों के समन्वय की जिम्मेदारी दूरसंचार विभाग (डीओटी) निभाएगा। विभाग उद्योग, शिक्षाविदों, विभिन्न सरकारी एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर इस दिशा में काम करेगा।

मंत्रालय के अनुसार, यह पहल केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के उस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगी, जिसमें भारत को 6जी तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत ने वैश्विक 6जी मानकों और पेटेंट में 10 प्रतिशत योगदान देने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इस पहल की घोषणा अमेरिका की जी-20 अध्यक्षता में 1 एवं 2 सितंबर को नॉर्थ कैरोलिना में आयोजित जी-20 इनोवेशन मंत्रिस्तरीय बैठक के अवसर पर की गई। इस दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री जितिन प्रसाद और अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के बीच औपचारिक मुलाकात भी हुई।

‘कॉल टू एक्शन’ के तहत सहभागी देश 6जी नेटवर्क के लिए सुरक्षा, लचीलापन, संसाधन दक्षता और नवाचार आधारित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देंगे। इसके अलावा 6जी अनुसंधान एवं विकास, वैश्विक मानकीकरण, सुरक्षित आपूर्ति शृंखला, साइबर सुरक्षा जोखिमों के आकलन और 5जी-6जी तकनीकों के वैश्विक विस्तार में सहयोग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

मंत्रालय ने कहा कि भारत की यह भागीदारी ‘भारत 6जी विजन’, ‘भारत 6जी एलायंस’ और स्वदेशी 4जी व 5जी तकनीकी ढांचे जैसी पहलों पर आधारित है। आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप यह कदम दूरसंचार क्षेत्र में भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत करेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर